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103 बुखार, खांसी-जुकाम के बाद भी नहीं की कोरोना की जांच, लाल पैथ लैब से पॉजिटिव रिपोर्ट आने से मचा हड़कंप

Wed, 01 Apr 2020 08:03 AM IST
शाहरुख खान संदीप वर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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corona virus - फोटो : amar ujala
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ग्रेटर नोएडा के गामा-1 स्थित संजीवनी अस्पताल के डॉक्टरों ने 26 मार्च को हालत खराब होने पर घोड़ी बछेड़ा निवासी 21 वर्षीय युवक को राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में कोरोना की जांच के लिए रेफर किया था लेकिन उसे खांसी-बुखार की दवा देकर लौटा दिया गया। 
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घर पहुंचकर हालत बिगड़ने पर उसे फिर से संजीवनी अस्पताल में भर्ती कराया गया। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने लाल पैथ में उसका सैंपल भेजा। 29 की शाम को मरीज की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आई, तब जाकर उसे जिम्स में भर्ती किया गया।

कोरोना के मामलों को गंभीरता से लेने का निर्देश है, इसके बावजूद मरीज को अस्पताल में जांच और भर्ती होने के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मरीज के परिजन ने बताया कि युवक को 24 मार्च को ही सिरदर्द की दिक्कत थी। 
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निजी अस्पताल से दवा लेने के बाद दो दिन ऐसे ही बीते। 26 को बुखार 103 डिग्री पहुंचने पर संजीवनी अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टरों ने कोरोना का संदेह जताते हुए जिम्स में जांच कराने के लिए रेफर किया। 
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वहां मामूली खांसी, बुखार बताते हुए उसे वापस भेज दिया गया। घर पहुंचकर तबीयत बिगड़ी तो उसे फिर संजीवनी अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने डॉक्टर लाल पैथ से जांच कराई। जिसमें 29 मार्च की शाम को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। परिजन ने बताया कि उसे युवक को भर्ती कराने के लिए स्थानीय सांसद, विधायक आदि से संपर्क करना पड़ा।

संजीवनी अस्पताल दो दिन के लिए सील
मरीज में कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद संजीवनी अस्पताल को दो दिन के लिए सील कर दिया गया है। मंगलवार को अस्पताल के आठ लोगों (एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, तीन नर्स, दो लैब टेक्नीशियन, एक वार्ड बॉय) के सैंपल जिम्स में लिए गए। अस्पताल के संचालक डॉ. डीएस चौहान ने भी अपना सैंपल डॉ. लाल पैथ में दिया है। वहीं युवक के छह परिजन को पहले सेक्टर-39 दौड़ लगाने के बाद जिम्स में ही सैंपल लिए गए हैं। इनमें युवक के माता-पिता, छोटा भाई, चाचा समेत अन्य लोग शामिल हैं।

गढ़ी चौखंडी मार्केट में राशन की दुकान पर बैठता था पीड़ित
युवक नॉलेज पार्क स्थित एक कॉलेज से बीबीए की पढ़ाई कर रहा है। परिजन ने बताया कि वह नोएडा के गढ़ी चौखंडी में एक राशन की दुकान भी संभालता है। आशंका है यहीं पर किसी ग्राहक से उसको संक्रमण हो गया हो। कभी-कभी वह अल्फा-1 स्थित एक दूध डेयरी में भी छोटे भाई के नहीं होने पर बैठता था। युवक के संपर्क में आने वाले लोगों की भी जांच कराई जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों पर ही मरीजों की जांच की जा रही है। कोरोना पर की गाइडलाइन के अनुसार ही जांच की जाती है। सभी मरीजों की कोरोना जांच नहीं की जाती है। - ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार, निदेशक, राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान
 
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