दिल्ली में कोरोना वायरस (फाइल फोटो)
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दिल्ली में सोमवार को कोरोना वायरस के 3229 नए मामले आए हैं। जबकि 26 लोगों की मौत हो गई है। इसी के साथ कुल संक्रमितों की संख्या 2,21,533 हो गई है। राजधानी में सोमवार को 3374 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है। दिल्ली में अब तक कुल 1,88,122 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। कोरोना वायरस से दिल्ली में अब तक कुल 4770 मरीजों की मौत हो चुकी है। राजधानी में अभी कुल 28641 सक्रिय मामले हैं।
दिल्ली सरकार ने जानकारी दी है कि 9859 आरटी-पीसीआर जांच और 35025 रैपिड एंटीजन जांच की गई हैं। दिल्ली में अब तक कोरोना वायरस की कुल 21,84,316 जांच की गई हैं। दिल्ली में सोमवार को कुल 44884 जांच की गई हैं। राजधानी में अभी कुल कंटेनमेंट जोन की कुल संख्या 1517 हो गई है। दिल्ली में अभी कुल 16568 मरीज होम आइसोलेशन में हैं। राजधानी में पॉजिटिविटी रेट 10.14 प्रतिशत है। जबकि मृत्यु दर 2.15 प्रतिशत है।
दिल्ली में बढ़ रहे संक्रमण के मामले, पर मृत्यु दर में आ रही गिरावट
राजधानी में कोरोना के मरीज भले ही रोज नया रिकॉर्ड बना रहे हों, लेकिन संक्रमण से होने वाली मौतों में लगातार गिरावट आ रही है। इससे 15 दिन में मृत्यु दर एक फीसदी से नीचे पहुंच गई है। अप्रैल के बाद ऐसा पहली बार है कि यह दर इतनी कम हुई है। सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों और प्रत्येक वर्ग के सहयोग के चलते मृत्यु दर को कम करने में सफलता मिली है।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, 29 अगस्त से अब तक कोरोना के 46,938 मामले आए हैं। इस दौरान संक्रमण की चपेट मेें आने से 340 लोगों की मौत हुई है। इस लिहाज से देखें तो मृत्यु दर 0.78 फीसदी रही है। अब रोज औसतन तीन हजार से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं और 22 लोगों की मौत हो रही है। जून में इतने ही केस आ रहे थे और औसतन 80 लोगों की मौत हो रही थी। इस समय कुल मृत्यु दर भी कम होकर 2.1 फीसदी हो गई है।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि संक्रमण के मामलों के मुकाबले दैनिक मौतों के आंकड़ों मेें काफी कमी आ गई है। संक्रमण से होने वाली मौतों को कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इससे पता चलता है कि विभाग की ओर से उठाए गए कदम सही दिशा में जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एंबुलेंस की संख्या छह गुना तक बढ़ा दी गई है। इससे मरीजों को समय पर अस्पताल में पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही गंभीर मरीजों की पहचान कर उन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि मौत के आंकड़ों को शून्य पर लाया जाए। इसके लिए कई अस्पतालों में आईसीयू बेड की संख्या को भी बढ़ाया जा रहा है।