कोरोना वायरस का पहला प्लाज्मा ट्रायल देश में सफल हो चुका है। दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती मरीज पर प्लाज्मा तकनीकी का इस्तेमाल किया गया था। सोमवार को मरीज से वेंटिलेटर हटा लिया गया और उसके बाद भी मरीज की स्थिति काफी बेहतर है। कुछ ही समय पहले अस्पताल ने मरीज के परिजनों की सहमति पर प्लाज्मा तकनीक का ट्रायल शुरू किया था।
इस ट्रायल के जरिए कोरोना संक्रमित मरीज को रक्त चढ़ाया जाता है। इसके लिए उन लोगों का रक्त लिया जाता है जो पहले कोरोना संक्रमित हुए हों और अब ठीक होकर अस्पताल से छुट्टी ले चुके हों।
दरअसल एक ही परिवार के कई लोग बीमार होने के बाद मैक्स में भर्ती हुए थे जिनमें से दो वेंटिलेटर पर चले गए थे। बाकी ठीक हो चुके थे। इसी बीच वेंटिलेटर पर मौजूद एक मरीज की मौत हो चुकी थी लेकिन दूसरा मरीज वेंटिलेटर पर ही था। इसी मरीज पर ट्रायल शुरू किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार एक व्यक्ति के खून से अधिकतम 800 मिलीलीटर प्लाजमा लिया जा सकता है। वहीं कोरोना से बीमार मरीज के शरीर में एंटीबॉडीज डालने के लिए लगभग 200 मिलीलीटर तक प्लाजमा चढ़ाया जा सकता है। इस तरह एक ठीक हो चुके व्यक्ति का प्लाजमा 3 से 4 लोगों के उपचार में मददगार हो सकता है।
अस्पताल के निदेशक डॉ संदीप बुद्धिराजा ने बताया कि कोरोना संक्रमण से ठीक हुए व्यक्ति के रक्त का इस्तेमाल करते हुए मरीज को वेंटिलेटर से हटाया है। यह 49 वर्षीय मरीज दिल्ली का ही निवासी है और बीते 4 अप्रैल को कोरोना होने के बाद अस्पताल में दाखिला किया गया था। अब इलाज उन पर असरदार साबित हुआ। डॉ. बुद्घिराजा ने बताया कि कोरोना संक्रमण में अब प्लाज्मा तकनीक कारगर साबित हो चुकी है। इस ट्रायल के लिए जिसने रक्त दिया वह मरीज तीन सप्ताह पहले ही ठीक हो चुका है।