खाना बनने के बाद इसे इलाके के लोग मुस्लिम इलाकों में जाकर बांट रहे हैं। मंदिर के प्रमुख राजपाल सिंह धर्माचार्य बताते हैं कि हिंसा के बाद लोगों के अंदर एक-दूसरे के प्रति नफरत उत्पन्न हो गई थी, जिसे कोरोना संकट ने एक होने का मौका दिया है।
उन्होंने बताया कि इलाके में सैकड़ों की संख्या में प्रवासी मजदूर हर धर्म के हैं, फिर भी लोग बगैर किसी भेदभाव के उनकी मदद कर रहे हैं। वहीं करावल नगर में मोहम्मद आरिफ भी कुछ लोगों के साथ मिलकर बेसहारों के लिए भोजन का इंतजाम कर रहे हैं।
उनके लोग हर दिन हिंसा से प्रभावित इलाकों में जाकर घर-घर खाने का पैकेट देने का काम कर रहे हैं। आने वाले वक्त में रमजान का पाक महीना शुरू होने जा रहा है, जिसे लेकर रोजेदारों के लिए विशेष इंतजाम की भी तैयारी चल रही है।