पुलिस अधिकारी के अनुसार, जब यह मामला हाथ से निकलता जा रहा था, तो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने दखल दिया। मंगलवार को उनकी मौजूदगी में निजामुद्दीन स्थित मरकज हाउस को खाली कराया गया।
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने दो दिन पहले यह जानकारी दी कि यहां से गए या इन लोगों के संपर्क में आए करीब 9000 लोगों की पहचान कर उन्हें क्वारंटाइन किया गया है।
शनिवार को अग्रवाल ने कहा, 17 राज्यों में कोरोना के 1023 मामले निजामुद्दीन मरकज से जुड़े हुए हैं।देश में कोरोना पीड़ितों की कुल संख्या में यह आंकड़ा 30 फीसदी से अधिक है।
निजामुद्दीन मरकज का मामला सामने आने के बाद केंद्र सरकार और दूसरे कई राज्यों की नींद उड़ चुकी थी। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों के मुख्यसचिवों व पुलिस महानिदेशकों से बातचीत कर उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी सूरत में 72 घंटे में सभी जमातियों को क्वारंटीन सेंटर में भेजना सुनिश्चित करें।
इसके बाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस पर आ गई। इसमें दिल्ली पुलिस, क्राइम ब्रांच, इंटेलिजेंस यूनिट और स्पेशल सेल को काम पर लगाया गया। जमातियों की बड़ी तादाद मरकज से देश के विभिन्न हिस्सों में जा चुकी थी।
केंद्र और राज्य सरकार के अलावा धार्मिक संगठनों के लोगों ने भी जमातियों से अपील की थी कि वे सामने आएं। इस अपील का असर कहीं भी देखने को नहीं मिला। इसके बाद यह माना गया कि जमाती खुद से बाहर नहीं आएंगे, उन्हें खोजना ही पड़ेगा।
चूंकि 72 घंटे का समय था और पुलिस के पास बहुत से लोगों का पता भी नहीं था। पुलिस के पास केवल यह जानकारी थी कि फलां राज्य में इतने जमाती पहुंचे हैं। यह सब जानकारी जुटाकर दिल्ली पुलिस ने दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ कुछ जानकारी साझा की।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, मरकज में आए सभी लोगों के मोबाइल फोन की सूची प्रदेशों के हिसाब से तैयार की गई। चूंकि फोन सर्विलांस की कार्रवाई लंबे समय तक के लिए नहीं होनी थी, इसलिए इसे लेकर किसी बड़े अधिकारी की मंजूरी नहीं ली गई।
हालांकि लंबे समय के लिए किसी का फोन सर्विलांस पर लगता है, तो उसके लिए गृह सचिव तक की मंजूरी लेनी पड़ती है। यहां पर पुलिस को केवल तीन-चार दिन के लिए फोन सर्विलांस की जरूरत थी, इसलिए यह औपचारिकता जिला पुलिस ने अपने स्तर पर पूरी कर ली।
दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों की पुलिस ने भी अपने यहां पर जमातियों के मोबाइल फोन सर्विलांस पर लगा दिए। नतीजा, 72 घंटे से पहले ही 9 हजार से अधिक जमातियों को तलाश कर क्वारंटीन सेंटरों में छोड़ दिया गया।
अधिकांश राज्यों की पुलिस मोबाइल ट्रेस कर जहां भी गई, वहां एंबुलेंस अपने साथ ले जाती थी। हरियाणा, तमिलनाडु, राजस्थान, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, असम, उत्तरप्रदेश, और मध्यप्रदेश सहित 17 राज्यों में जमातियों को ढूंढ निकाला गया। फोन सर्विलांस तकनीक पुलिस के लिए बड़ी मददगार साबित हुई।
अच्छी बात ये रही कि इस मुहिम में पुलिस को बहुत से ऐसे लोग भी मिले, जिन्होंने यह बता दिया कि मरकज से आने के बाद कितने लोग इनसे संपर्क में आए हैं। पुलिस ने ऐसे सभी लोगों को क्वारंटीन में भेज दिया।