डॉक्टर ने बताया कि इन दोनों दूध, चाय अथवा पानी को उबाल कर उसमें अदरक, तुलसी, काली मिर्च, लौंग वसाका, गिलोय और छोटी पीपली को डालकर पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। पीपली की गोली त्रिकुट के नाम से बाजार में आसानी से मिल जाती है।
वहीं, रात में दूध में हल्दी, मुनक्का, खजूर और अश्वगंधा डालकर पीने से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। विशेष तौर पर बच्चे और बुजुर्गों को इसका सेवन करना चाहिए।
चिकित्सक की सलाह से लें आयुर्वेदिक दवाएं
डॉक्टर ने कहा कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कई लोग आयुर्वेदिक दवाइयां भी लेते हैं। ऐसे में चिकित्सक की सलाह के बिना आयुर्वेदिक दवा ना लें। सितोपलादि चूर्ण, लक्ष्मी विलास रस, चंद्र अमृत, वासावलेह, टंकण भस्म, कंटकारी, अवलेह व अगस्त्य हरीतकी आदि का सेवन आवश्यक रूप से चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
सकारात्मक उर्जा के प्रभाव से भी मजबूत होता है रोग प्रतिरोधक तंत्र
दिन में अधिक से अधिक सकारात्मक रहें। इसके लिए म्यूजिक थेरेपी व लाफ्टर थेरेपी समेत सात्विक भोजन और सकारात्मक व्यक्तियों के संग बातचीत कर सकते हैं। शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने से दिमाग में सेराटोनिन हार्मोन का स्राव होता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर है।