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कोरोना : जमानती ना होने की स्थिति में निजी मुचलके पर रिहा होंगे कैदी

Sat, 11 Apr 2020 09:39 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : ANI
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हाईकोर्ट ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति के प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए विचाराधीन कैदियों को निजी मुचलके पर जेल से रिहा करने की अनुमति दे दी है। कोरोना वायरस के कारण जेलों में कैदियों की संख्या कम करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

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न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंड लॉ और मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने कहा जमानती नहीं पेश करने के कारण जो विचाराधीन कैदी अभी तक जेल में बंद हैं, उनके लिए यह कदम उठाया गया है। पीठ ने कहा कि ये निर्देश उच्चाधिकार प्राप्त समिति के सुझावों को लागू करने के लिए दिए हैं। यह आदेश उन विचाराधीन कैदियों पर लागू होगा जिन्हें सात अप्रैल या इससे पहले जमानत दी गई है।

हाईकोर्ट की जस्टिस हीमा कोहली की अध्यक्षता वाली समिति में यह बात उठी थी कि कई विचाराधीन कैदी ऐसे हैं, जो जमानत मिलने के बावजूद जेलों में ही हैं क्योंकि उनके पैरोकार जमानती पेश नहीं कर पा रहे हैं। जेल में कैदियों की भीड़ कम करने को लेकर इस उच्चाधिकार समिति का गठन किया गया था। इस समिति में तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल, प्रमुख सचिव (गृह) सत्य गोपाल और कंवलजीत अरोड़ा भी शामिल हैं।
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इस बीच दिल्ली सरकार के स्थायी वकील राहुल मेहरा ने दलील दी थी कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति के सुझावों को लागू करना मोती राम बनाम मध्य प्रदेश सरकार और आरडी उपाध्याय बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप है, जिनमें निजी मुचलके पर जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया गया था। मेहरा ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी मामले की जानकारी नहीं है जिसमें कोई विचाराधीन कैदी जमानती मुचलका नहीं भर पाने की स्थिति में जमानत मिलने के बाद भी जेल में पड़ा हुआ है।

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