फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली में कम हुआ कोरोना का संक्रमण लेकिन मौत अभी भी देश में ज्यादा

Thu, 03 Dec 2020 12:28 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

  • दो सप्ताह से रोजाना दिल्ली में सबसे ज्यादा लोगों की हो रही है मौत 
  • अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर 30 फीसदी से अधिक हुईं मौतें
  • 42 हजार सैंपल की जांच में केवल एक फीसदी सैंपल को संक्रमित बता रही एंटीजन जांच
विज्ञापन
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना वायरस और इसे लेकर गणितीय आंकड़ें हर दिन अलग अलग रुप में सामने आते हैं। सरकारों के स्तर पर इन आंकड़ों का अलग रुप होता है और विशेषज्ञों के स्तर पर अलग। कोरोना वायरस की तीसरी लहर देख चुकी इकलौती दिल्ली में अब संक्रमण दर सबसे कम होने की वजह से स्थिति नियंत्रण में आने का दावा किया जा रहा है लेकिन इन्हीं आंकड़ों का एक पक्ष यह भी बता रहा है कि कोरोना का संक्रमण कम जरूर हुआ है मगर मौत का आंकड़ा लगातार शीर्ष स्तर पर बना हुआ है। 
विज्ञापन


स्थिति यहां तक है कि पिछले दो सप्ताह में रोजाना दिल्ली में सबसे ज्यादा लोगों की कोरोना वायरस के चलते मौत हो रही है। वहीं अस्पतालों के स्तर पर आकलन किया जाए तो कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर गंभीर हालत में पहुंचने वाले मरीजों की अस्पतालों में भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं। इस अवधि में करीब 30 फीसदी मौतें दर्ज की जा चुकी हैं।

आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दिन में दिल्ली में कोरोना वायरस की संक्रमण दर पांच फीसदी दर्ज की गई है जोकि बीते 42 दिन में सबसे कम है लेकिन अगर मौत के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले एक दिन में महाराष्ट्र के बाद दिल्ली दूसरे स्थान पर है। 01 दिसंबर को महाराष्ट्र में 95 और दिल्ली में 86 लोगों की मौत दर्ज की गई। वहीं 2 दिसंबर को जारी दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन में 82 लोगों की मौत बताई गई है। 
विज्ञापन


इनके अलावा 30 नवंबर को देश में सबसे ज्यादा मौतें दिल्ली में हुईं। इस दौरान दिल्ली में 108 लोगों की मौत हुई। इतना ही नहीं 28 नवंबर को 89, 27 नवंबर को 98 और 26 नवंबर को 91 लोगों की मौत हुई। इनके अलावा बीते एक नवंबर से 30 नवंबर के बीच कोरोना की तीसरी लहर के दौरान दिल्ली में 2663 लोगों की कोरोना वायरस के चलते मौत हुई है। यानि पिछले महीने देश की राजधानी में हर दिन 88 लोगों ने कोरोना वायरस के चलते दम तोड़ दिया जोकि अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ही अनुसार दिल्ली में पहले की तुलना में स्थिति काफी नियंत्रण में है लेकिन रोजाना होने वाली मौतों पर फिलहाल नियंत्रण नहीं है। इसे लेकर दिल्ली राज्य को अस्पतालों के स्तर पर रणनीति में सुधार के लिए कहा गया है। वहीं बीते 15 नवंबर को गृह मंत्रालय में हुई बैठक के दौरान भी अस्पताल में भर्ती होने के पहले 72 घंटे में सबसे ज्यादा मौतें होने की जानकारी दी गई है। इसी बैठक में अस्पतालों के स्तर पर सुधार के लिए भी कहा गया। हालांकि इस बैठक को खत्म होने के 17 दिन बाद भी स्थिति में बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दिया है।

10 दिन में सबसे ज्यादा मौतें
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के ही आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले 10 दिन में दिल्ली में 1.96 फीसदी मरीजों की मौत हुई है। जबकि शुरुआत से लेकर अब तक ओवरऑल मृत्युदर दिल्ली में 1.62 फीसदी है। ऐसे में स्पष्ट है कि दिल्ली में कोरोना वायरस की मृत्युदर पिछले कुछ दिनों में सबसे ज्यादा दर्ज की जा रही है। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पूर्व प्रोफेसर रिजो एम जॉन का कहना है कि दिल्ली में कोरोना वायरस से मरने वालों का आंकड़ा बहुत ज्यादा है। यह जता रहा है कि दिल्ली में गंभीर मरीजों के उपचार को लेकर अभी भी लापरवाही बरती जा रही है। अगर आंकड़ों पर ही गौर करें तो दिल्ली में सबसे ज्यादा एक दिन में मौत का रिकॉर्ड इसी तीसरी लहर में बना है जब 18 नवंबर को एक दिन में 131 मरीजों की मौत हुई।

15 फीसदी मरीज भर्ती, फिर भी मौत पर नियंत्रण नहीं
सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि देश में 80 फीसदी मरीज बिना लक्षण या हल्के लक्षण वाले मिल रहे हैं। जबकि अन्य 20 में से 5 फीसदी गंभीर अवस्था में मिल रहे हैं जिन्हें अस्पतालों में भर्ती किया जा रहा है। इनके अलावा शेष 15 में से करीब 10 फीसदी मरीजों को होम आइसोलेशन से अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है। कुल मिलाकर 15 फीसदी मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया जा रहा है इसके बाद भी मौत की स्थिति पर नियंत्रण नहीं है। अगर अस्पतालों में भर्ती होने का आंकड़ा कई ज्यादा होता तो जरा सोचिए मौत की स्थिति कितनी भयावह हो सकती थी? उन्होंने कहा कि सरकारों को अस्पतालों के स्तर पर समीक्षा योजना की आवश्यकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें