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कोरोना ने सरकार को किया कंगाल, कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है असर!

Wed, 06 May 2020 06:14 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कर्मचारियों के वेतन, कोरोना से लड़ाई और गरीबों की दी जा रही योजनाओं से बढ़ा खर्च
  • आय की कमी ने बढ़ाई सरकार की चिंता
  • स्थिति कंट्रोल न हुई तो सरकार की कई योजनाओं में कटौती की आशंका
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Employees - फोटो : file
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विस्तार
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लॉकडाउन के कारण पूरी अर्थव्यवस्था ठप पड़ गई है। सरकार के पास आय का कोई साधन नहीं बचा है। इसी बीच दिल्ली सरकार के लगभग 13 हजार कर्मचारियों के वेतन और कोरोना के इलाज पर होने वाले बेतहाशा खर्च ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
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कोरोना काल में गरीबों को दी जाने वाली सहायता ने भी सरकार का खर्च बढ़ा दिया है। आशंका है कि अगर लंबे समय तक यही हालात बने रहे तो सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं में कटौती करनी पड़ सकती है।

दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कोरोना के कारण आर्थिक गतिविधियों के ठप पड़ जाने से सरकार के पास आय का कोई साधन नहीं बचा है। केंद्र सरकार की आय में भी भारी कमी आई है जबकि इसी बीच कोरोना और गरीबों को भोजन मुहैया कराने में भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ रही है।
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अगर ये हालात लंबे समय तक चलते हैं, तो इससे मुश्किलें बढ़ सकती हैं और कई प्रमुख योजनाओं में कटौती करनी पड़ सकती है।

कर्मचारियों का भारी बोझ

दिल्ली सरकार में काम करने के लिए लगभग 12,754 कर्मचारियों के पदों को (वर्ष 2018 तक) अनुमति मिली हुई है। इसमें इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) के 56 पद, दिल्ली, अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूह सिविल सर्विसेज (DANICS) के 309 पद और दिल्ली एडमिनिस्ट्रेटिव सबऑर्डिनेट सर्विसेज (DASS) के 8388 अधिकारी और अन्य अनेक कर्मचारी शामिल हैं।

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दिल्ली के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इन कर्मचारियों के मासिक वेतन में सरकार को भारी भरकम राशि खर्च करनी पड़ती है। इसके अलावा इन अधिकारियों के कार्य संचालन और अन्य आवश्यक सेवाओं में भी काफी खर्च करना पड़ता है।

कोविड-19 के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर बेतहाशा खर्च बढ़ा है। लेकिन इसी दौरान सरकार का राजस्व घट गया है। यही कारण है कि इन खर्चों से निबटने के लिए सरकार कुछ सेवाओं को चालू करना पड़ा है और पेट्रोल-डीजल जैसी आवश्यक वस्तुओं पर वैट बढ़ाना पड़ा है।

मुख्यमंत्री अऱविंद केजरीवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि अप्रैल माह में सरकार को अब तक का सबसे कम राजस्व प्राप्त हुआ है। इस वर्ष यह आंकड़ा 300 करोड़ से कुछ अधिक रहा है, जबकि इसके पूर्व वर्ष 2019 में यह आंकड़ा 3500 करोड़ तक था।

जाहिर है कि सरकार के सामने भारी खर्च से निबटने की कठिन चुनौती है। यह ऐसे समय में हो रहा है जबकि व्यापार गतिविधियां ठप हैं और उसके पास आय के साधन बेहद सीमित हैं। 

आप का आरोप

आम आदमी पार्टी नेता ब्रजेश गोयल ने कहा कि यह ध्यान देने वाली बात है कि अप्रैल में जो राजस्व प्राप्त होता है, उसमें सबसे ज्यादा भागीदारी मार्च में हुए व्यापार की होती है। लेकिन यह वह समय था जबकि अंतिम सप्ताह को छोड़कर लॉकडाउन नहीं लगा था।

इससे पता चलता है कि देश की आर्थिक स्थिति पहले ही खराब हो चुकी थी। कोरोना ने स्थिति को और अधिक खराब करने का काम किया है। अगर सरकार अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए उचित उपाय नहीं करती है तो आने वाले समय में अर्थव्यवस्था और अधिक खराब होगी।

कहां कितने कोरोना पॉजिटिव केस

दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में इस समय कई लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसमें पूर्वी दिल्ली में 205, केंद्रीय दिल्ली में 184, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में 130, पश्चिमी दिल्ली में 122, दक्षिणी दिल्ली में 70, उत्तरी दिल्ली में 60, शहादरा जिले में 48, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में 42, नई दिल्ली में 37, उत्तर-पश्चिम दिल्ली में 32, उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 25 मामले शामिल हैं।

दिल्ली में सबसे ज्यादा कोरोना मामलों की संख्या एक वर्ग विशेष के कारण आई थी। इस समय भी इसके कारण 1080 लोगों को क्वारंटीन/होम क्वारंटीन करके रखा गया है जहां इनका इलाज चल रहा है। इसके अलावा लगभग 3236 (अन्य कैटेगरी) के लोगों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है।

अब तक इतने मामले सामने आए

देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार को कोरोना मरीजों का आंकड़ा पांच हजार को पार कर 5104 तक पहुंच गया। पिछले चौबीस घंटे में 206 नए मामले सामने आए हैं, जबकि इसी दौरान 37 लोग स्वस्थ हुए हैं। इस समय कुल सक्रिय केसों की संख्या 3572 है जबकि अब तक 64 लोगों की मौत हो चुकी है।

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