जेएनयू छात्र संघ ने सोमवार को आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन अंडरग्रेजुएट बीए और बीटेक कोर्स में हिंदी को अनिवार्य विषय बनाकर नया विवाद पैदा करना चाहता है। विश्वविद्यालय की ओर से जबरन हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है।
जेएनयू छात्रसंघ के मुताबिक जेएनयू में 28 जून को एकेडमिक काउंसिल की बैठक होगी। इसमें अंडरग्रेजुएट बीए और बीटेक कोर्स में हिंदी को अनिवार्य विषय बनाने पर चर्चा हो सकती है। बैठक में एजेंडे पर इस विषय को शामिल किया गया है।
पिछले साल अञ्चतूबर में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में हिंदी को अनिवार्य बनाने के लिए पत्र लिखा था। इसके साथ ही सरकारी विभागों में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कार्रवाई की बात कही गई थी।
छात्रसंघ ने आरोप लगाया कि इसके पीछे जेएनयू प्रशासन सरकार और राष्ट्रीय स्वयं सेवक का छिपा हुआ एजेंडा लागू करना चाहती है। जेएनयू के रेञ्चटर वन चिंतामणि महापात्रा ने कहा कि हिंदी थोपने जैसा कोई फैसला नहीं लिया गया है।