100 वर्ग मीटर से अधिक प्लॉटों के लिए वर्षा जल संरक्षण
भवन नियमों के प्रावधानों के मुताबिक 100 वर्ग मीटर से अधिक आकार के प्लॉटों के लिए वर्षा जल संरक्षण अनिवार्य है। जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिहाज से 100 वर्गमीटर से अधिक आकार के प्लॉटों के मालिकों को पानी के बिलों में 10 फीसदी की छूट दी जाएगी। 500 वर्गमीटर से अधिक आकार के प्लॉट मालिकों की ओर से वर्षा जल संरक्षण की व्यवस्था नहीं किए जाने पर उनपर जुर्माना सहित पानी का बिल भी डेढ़ गुणा कर दिया जाएगा।
हरियाणा पर कम होगी निर्भरता
हरियाणा से दिल्ली को रोजाना करीब 150 क्यूसेक पानी की आपूर्ति की जाती है। मानसून के दौरान छह लाख क्यूसेक पानी दिल्ली के लिए छोड़ा जाता है। लेकिन दिल्ली के पानी के लिहाज से आत्मनिर्भर बन जाने पर पानी में अमोनिया के कारण अशुद्धता और प्रदूषण की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। द्वारका में 50 एमजीडी क्षमता का नया जल शोधन संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है। इन प्रयासों से दिल्ली को करीब 246 एमजीडी अतिरिक्त पानी की उपलब्धता होगी।
345 कॉलोनियों में डाले सीवर, 13 लाख आबादी को मिलेगा फायदा
अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर की बुनियादी सुविधा को दुरस्त करने की पहल करते हुए दिल्ली सरकार ने 345 अनधिकृत कॉलोनियों में पिछले चार वर्ष में सीवर डालने का कार्य पूरा कर लिया है, जबकि 355 में अभी कार्य प्रगति पर है। इसके तहत पालम, बिजवासन, मटियाला, द्वारका, नजफगढ़, मुंडका, रिठाला और विकास पुरी विधानसभा क्षेत्र की कॉलोनियों में सीवर लाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया गया है, जिसे दिसंबर 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इससे करीब 13 लाख की आबादी को फायदा मिलेगा।