संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा कि सरकार और नौकरशाही में संघर्ष अच्छी बात नहीं है। होना भी नहीं चाहिए, लेकिन दिल्ली में ऐसा हो रहा है। राजनीतिक बयानबाजी से अलग अगर हम सांविधानिक प्रावधानों की बात करें तो हमें समझना पड़ेगा कि यूपी और पंजाब सरीखा राज्य नहीं है। विधानसभा और अपनी सरकार होने के बाद भी यह केंद्र से शासित प्रदेश है।
उन्होंने कहा कि हमें दिल्ली की शासनिक व प्रशासनिक व्यवस्था को इसी परिपेक्ष्य में देखना चाहिए। इसमें उपराज्यपाल की शक्तियां तुलनात्मक रूप से ज्यादा हैं। मुख्यमंत्री अभी की सूरत में उपराज्यपाल की बराबरी नहीं कर सकते। कुछ मामलों में उनके अपने अधिकार हैं। फिर, उपराज्यपाल केंद्र के प्रतिनिधि भी हैं। ऐसे में सरकार और उपराज्यपाल को तालमेल के साथ काम करना चाहिए। इससे किसी तरह के टकराव की गुंजाइश नहीं रहेगी।