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चौतरफा घिरी दिल्ली सरकार पर इनका भी हमला

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प्रशांत भूषण ने दिल्ली सरकार पर हमला बोला है। उनका मानना है कि दिल्ली में किसी अधिकारी की नियुक्ति का अंतिम अधिकार उपराज्यपाल का है।
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दिल्ली कैबिनेट और उपराज्यपाल के बीच का टकराव घातक है। इससे संवैधानिक संकट खड़ा होने की आशंका बन रही है। भूषण ने सलाह दी कि सार्वजनिक बयानबाजी की जगह सरकार को कोर्ट का सहारा लेना चाहिए। प्रशांत भूषण ने बृहस्पतिवार को योगेंद्र यादव व आनंद कुमार के साथ जंगपुरा में प्रेस कांफ्रेंस की।

इसमें प्रशांत भूषण ने कहा कि दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है। अधिकारियों की नियुक्तियों का अंतिम अधिकार उपराज्यपाल के पास है। दिल्ली सरकार के व्यवहार से माहौल अस्थिरता का बन गया है।
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इससे राजधानी संवैधानिक संकट की तरफ बढ़ रही है। विवाद बढ़ने से सबसे ज्यादा नुकसान जनता को होगा। वहीं, योगेंद्र यादव का मानना है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करना सही है, लेकिन राज्य सरकार का तरीका गलत है।
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मोदी सरकार पर भी बोला हमला

भूषण का आरोप है कि मोदी सरकार एकदम पारदर्शी नहीं है। भ्रष्टाचार रोकने के लिए बने संस्थानों को भी बेदम किया जा रहा है। सरकार बनने के एक साल बाद लोकपाल की नियुक्ति नहीं हुई।

दुर्भाग्यपूर्ण यह भी है कि दिल्ली सरकार में भी यह पद खाली पड़ा है। दूसरी तरफ केंद्रीय सतर्कता आयोग केदो पद खाली पड़े हैं। सीवीसी में नियुक्तियों के लिए कुछ लोगों के नाम केंद्र सरकार ने शॉर्टलिस्ट किए हैं। इनमें से एक शख्स पर कई मामलों में गड़बड़ी के आरोप हैं।

राज अभियान के बैनर तले काम कर रहे ‘आप’ से निष्कासित नेताओं ने राजनीतिक पार्टी बनाने की दिशा में एक कदम और बढ़ाया है। आनंद कुमार ने बताया कि 29 सदस्यीय एक राष्ट्रीय वर्किंग कमेटी का गठन किया गया है।

इसमें प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, आनंद कुमार, अजित झा, पंकज पुष्कर भी शामिल हैं। वहीं, योगेंद्र यादव ने कहा कि स्वराज अभियान फिलहाल जय किसान आंदोलन शुरू करने जा रहा है। संसद सत्र के दौरान दिल्ली में बड़ा आंदोलन भी होगा।
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