उच्च न्यायालय ने आईटीबीपी के कांस्टेबल की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें पत्नी के अवसाद से पीड़ित होने एवं नवजात बच्चे को खतरा होने का हवाला देते हुए लद्दाख स्थानांतरण करने के बल के फैसले पर रोक लगाने की गुहार लगाई गई थी।
न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह और न्यायमूर्ति आशा मेनन की खंडपीठ ने अपने फैसले में कांस्टेबल की पत्नी की चिकित्सा जांच करने वाले बोर्ड की राय और महिला का बयान रेखांकित किया जिसमें उन्होंने कहा कि छोटा बच्चा होने वजह से वे लद्दाख नहीं जाना चाहते।
खंडपीठ ने कहा कि मेडीकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि महिला बिलकुल ठीक है और सामान्य जीवन जी रही है।
अदालत ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि यह याचिका केवल स्थानांतरण रोकने के लिए दायर की गई और याचिकाकर्ता इस हद तक गया कि उसने पत्नी के प्रसव बाद अवसादग्रस्त होने एवं नवजात बेटे को उससे खतरा होने तक का दावा किया।
खंडपीठ ने गुण दोष के आधार पर याचिका खारिज करते हुए उस अंतरिम आदेश को भी रद्द कर दिया जिसमें याचिकाकर्ता के स्थानांतरण पर रोक लगाई गई थी। इससे पहले प्राधिकार ने भारत-तिब्बत पुलिस बल (आईटीबीपी) में कांस्टेबल को 17 मार्च से लद्दाख में तैनात बल की 37वीं बटालियन में अपनी सेवा देने का आदेश दिया था।
अदालत ने याची को एक सप्ताह में नए स्थान पर अपनी डयूटी संभालने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याची तय अवधि में डयूटी पर नहीं जाता तो संबंधित अथारिटी उसके खिलाफ तय नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।