कांग्रेस के दो दिग्गजों के चुनावी मैदान छोड़ने के बाद पार्टी के कुछ और वरिष्ठ नेता भी चुनावी जंग से बचने के तरीके ढूंढ रहे हैं। कुछ नेता ऐसे हैं जिनके जीतने की उम्मीद कम है। इसलिए वह अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए चुनावी मैदान में उतरने से बच रहे हैं।
कई नेता इस पसोपेश में हैं कि पार्टी आलाकमान के निर्देश की अनदेखी हुई तो उन पर गाज गिर सकती है और चुनाव लड़ते हैं तो हो सकता है कि इसके परिणाम से उनकी प्रतिष्ठा को आंच आए।
पूर्व सांसद और विधायक रह चुके महाबल मिश्रा ने चुनाव में टिकट की दावेदारी पेश नहीं की है। आठ बार दिल्ली के चुनावी रण में भाग्य आजमा चुके मिश्रा का कहना है कि दो दशक से अधिक समय से चुनाव लड़ रहे हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने भाग्य आजमाया, लेकिन विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाना नहीं चाहते हैं। हाल ही में उनके पुत्र ने कांग्रेस छोड़कर आप का दामन थाम लिया, लेकिन पूर्व सांसद का कहना है कि उन्हें पार्टी से उन्हें कोई गुरेज नहीं है। चुनाव नहीं लड़ने का उनका निजी फैसला है।
पूर्व मंत्री और सांसद अजय माकन बुधवार को ही विदेश चले गए। माकन चुनावी घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष हैं। इसलिए टिकट की घोषणा से पहले विदेश चले जाने के पीछे कई वजह बताई जा रही हैं। वहीं, तीन से चार नेता ऐसे हैं जो टिकट की दावेदारी पेश उन विधानसभा क्षेत्रों से कर रहे हैं जहां पहले से ही जीत के प्रबल दावेदार मौजूद हैं।
माना जा रहा है कि टिकट की घोषणा होने तक आलाकमान के निर्देश से बचने के लिए दो पूर्व सांसदों समेत कई पूर्व विधायकों और पूर्व अध्यक्षों को भी चुनावी मैदान में उतरने से बचने का माकूल बहाना मिल जाए।
नहीं मिल रहा है कोई रास्ता
दिग्गजों में कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने चुनावी तैयारियां अपने बच्चों के लिए की है, लेकिन इस निर्देश के मुताबिक अगर वह चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें इसका फायदा मिलने के बजाय नुकसान हो सकता है। इस वजह से भी चुनाव लड़ने से बचने के लिए रास्ते की तलाश में हैं।