1. मालिकाना हक देने का नाटक करने से पहले बताया जाए कि कॉलोनियों का ले-आउट प्लान अब तक पास क्यों नहीं किया गया? लैंड यूज क्यों नहीं बदला गया? 2008 में नियमित करने संबधी पैरा 5.4 क्यों बदला गया?
2. क्या यह सही नहीं है कि इन कॉलोनियों की लाखों छोटी व बड़ी दुकानें, क्लीनिक, अस्पताल, ऑफिस, गोदाम बंद हो जाएंगे?
3. क्या यह सही नहीं है कि सरकार ने सरकारी जमीन व प्राइवेट जमीन को इस तरह दोबारा परिभाषित किया है कि लगभग 100 प्रतिशत कॉलोनियां सरकारी जमीन पर आ जाएंगी। पहले यह आंकड़ा केवल 10 प्रतिशत था। इस प्रकार 100 प्रतिशत मालिक सरकार को बढ़े हुए दामों पर शुल्क देंगे, जबकि पहले यह शुल्क केवल 10 प्रतिशत मालिक ही दिया करते थे।
4. क्या यह सही नहीं है कि मालिकाना हक के लिए अलग से कानून बनाने की जरूरत नहीं थी? जब एक साधारण से नोटिफिकेशन से खरीद फरोख्त व संपति का हस्तांतरण हो सकता है तो संसद के कानून की जरूरत क्यों पड़ी।
5. अब तक सरकार ने जोन ओ के लिए अंतिम नोटिफिकेशन क्यों नहीं निकाला? इससे10 लाख से ज्यादा लोगों को मालिकाना हक नहीं मिलेगा।
6. जिन कॉलोनियों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गई हुई है, क्या उनमें रहने वाले लाखों लोग मालिकाना हक से वंचित रह जाएंगे।
7. बढ़े हुए संपति हस्तांतरण शुल्क अनधिकृत कॉलोनी के लोग क्यों दें। सर्किल रेट के आधार पर शुल्क लेने का क्या औचित्य है?