नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस ने इस प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाया है। इस संबंध में उसने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को विस्तृत पत्र लिखकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टता और सुधार की मांग की है। बूथ मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन राजेश गर्ग ने यह पत्र भेजा है। पत्र में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े व्यावहारिक, प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं पर गंभीर चिंताएं जताई गई है। उधर, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि चुनाव आयोग का बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) को मतदाताओं से भरे हुए फॉर्म एकत्र करने और उनकी जानकारी के सत्यापन की जिम्मेदारी देना न तो व्यावहारिक है और न ही कानूनी रूप से उचित। उनका आरोप है कि आयोग इस प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों की जिम्मेदारी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों पर डालने की कोशिश कर रहा है, जबकि यह जिम्मेदारी केवल अधिकृत अधिकारियों, बीएलओ, एईआरओ और ईआरओ की होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि एसआईआर के दौरान 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाने की बात कही जा रही है, जबकि उसके बाद परिसीमन के कारण विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं काफी बदल चुकी हैं। ऐसे में बिना स्पष्ट मैपिंग के पुराने और वर्तमान क्षेत्रों का मिलान करना बेहद जटिल होगा। पार्टी ने मांग की है कि 2002 की सूची और वर्तमान विधानसभा क्षेत्रों के बीच स्पष्ट क्षेत्रवार मैपिंग राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाए। कांग्रेस ने यह भी आग्रह किया कि जब वर्तमान फोटोयुक्त मतदाता सूची को फ्रीज किया जाए, तो उसकी मुद्रित प्रतियां भी राजनीतिक दलों को दी जाएं, ताकि मतदाताओं की सही पहचान सुनिश्चित हो सके। देवेन्द्र यादव ने कहा कि मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है और इसे पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता व सभी दलों के परामर्श से ही संपन्न किया जाना चाहिए।