फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली: सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, दिल्ली में सड़कों पर उतरे कांग्रेस कार्यकर्ता

Fri, 25 Sep 2026 02:38 PM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
विज्ञापन
दिल्ली में कांग्रेस का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस ने शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन किया। दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, लखनऊ, कोलकाता और देहरादून समेत कई जगहों पर कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और पोस्टर-बैनर दिखाए।

विज्ञापन


दिल्ली में भारतीय युवा कांग्रेस शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भारतीय युवा कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में चुनाव आयोग के दफ्तर का घेराव करने के लिए रायसीना मार्ग से निकली। लेकिन दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें जंतर मंतर मार्ग पर ही रोक लिया गया व कुछ कार्यकर्ताओं को डिटेन कर लिया गया।

दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई और कांग्रेस के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया। रास्ते में पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था, बैरिकेड्स लगाए गए थे।
विज्ञापन


मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की वजह क्या?
प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी एक रिपोर्ट है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार एसआईआर से जुड़े कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, आपत्तियों में वैधानिक मतदाता पंजीकरण फॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा मतदाता सूची के डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

चुनाव आयोग ने विवाद पर क्या कहा?
हालांकि, चुनाव आयोग ने इस पर बयान जारी कर कहा था कि किसी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने कहा था कि उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी समर्थन प्राप्त है और वे निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जारी किए गए हैं। चुनाव आयोग ने यह भी कहा था कि केवल तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनाव प्रणाली में सुधार के लिए अपने सुझाव देने के लिए अधिकृत है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें