कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, दिल्ली से पूर्व राज्यसभा सदस्य, पार्टी के महासचिव जनार्दन द्विवेदी समेत तमाम नेताओं को शीला दीक्षित की कमी खल रही है। शीला दीक्षित के अभाव में कांग्रेस पार्टी की आंखों के सामने अंधेरा छाया है।
हालात यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष के बुलाने और कहने के बाद भी कई दिग्गज चुनाव लडऩे के लिए तैयार नहीं हुए। पूर्व अध्यक्ष अजय माकन ने खूब ना नुकूर की। अंत में बेटी के इलाज के लिए अमेरिका चले गए हैं। कांग्रेस के तमाम नेताओं को शीला का विरोध करने वाले अजय माकन अब अखर रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी के दिल्ली के नेताओं और कार्यकर्ताओं के पास दूसरी नाराजगी प्रभारी पीसी चाको की कार्य शैली को लेकर है। कांग्रेस के एक उपाध्यक्ष का कहना है कि जब शीला ने अध्यक्ष पद का भार संभाल लिया था तो चाको खूब टकराए। आम आदमी पार्टीसे गटबंधन के नाम पर टकराव हुआ।
लोकसभा चुनाव 2019 में आर-पार के खूब तीर चले, इसके बाद भी चुनाव नतीजे में कांग्रेस की स्थिति भाजपा के बाद थी। आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर रही। पार्टी नेता का कहना है कि दरअसल पीसी चाको राजनीति में बहुत पहले से हैं, लेकिन अभी भी दिल्ली को नहीं समझ पा रहे हैं।
कांग्रेस मुख्यालय के एक महासचिव इसे शीला दीक्षित का असर मानते हैं। उनका कहना है कि आज भी कांग्रेस पार्टी के पास शीला दीक्षित के 15 साल के राज को जनता के बीच में भुनाने से बड़ा कोई मुद्दा नहीं है। इसे जनता भी मान रही है।
राष्ट्रीय जनता दल से गटबंधन की नौबत
दिल्ली में कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रीय जनता दल को चार सीटें देने का मन बनाया है। गठबंधन में चुनाव लडऩे पर करीब-करीब सहमति बन गई है। घोषणा भर बाकी है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि दावा चाहे जितना बड़ा कर लें, लेकिन मौजूदा समय में पार्टी के पास दमदार उम्मीदवारों की बेहद कमी है।
पुराने बड़े नेता भी चुनाव लडऩे से कन्नी काट रहे हैं। शनिवार को कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशियों के चयन के लिए स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक है। बताते हैं बैठक तो होगी, लेकिन मजबूत दावेदारी कांटे भरी है। पार्टी के मुख्य फोकस में महज 20 सीटे हैं।