कोरोना की लड़ाई में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लगातार केंद्र के फैसलों पर सवाल खड़ा कर रहे हैं, तो प्रियंका गांधी योगी आदित्यनाथ के सही फैसलों की तारीफ भी कर रही हैं। कांग्रेस का रुख केवल सवाल खड़े करने का नहीं, बल्कि रचनात्मक भी है।
'कांग्रेस की रसोई' से दिल्ली में रोज 50 हजार से ज्यादा लोगों को भोजन मिल रहा है। कांग्रेस की इस रसोई का लाभ समाज के सबसे गरीब तबके के लोग उठा रहे हैं। कांग्रेसियों के मन में कहीं न कहीं यह भी है कि यह जमीनी कसरत उसे दिल्ली में दोबारा खड़ी करने में मददगार साबित हो सकती है।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने अमर उजाला को बताया कि जब दिल्ली से मजदूरों ने पलायन शुरू किया तब उन्होंने मजदूरों से संपर्क किया। सरकार दावे कर रही थी कि गरीब लोगों को भोजन मुहैया कराया जा रहा है, लेकिन गरीबों का कहना था कि उन्हें भोजन नहीं मिल पा रहा है और कोरोना से पहले उनके सामने भूख से मरने की नौबत आ गई है।
यही देखते हुए उन्होंने अपने शीर्ष नेताओं से संपर्क किया और दिल्ली में बड़े पैमाने पर लोगों को भोजन उपलब्ध कराने का काम शुरू किया।
चौधरी अनिल कुमार के मुताबिक वे दिल्ली में 175 जगहों पर भोजन उपलब्ध करवा रहे थे। लेकिन दिल्ली में हॉटस्पॉट बढ़ने के बाद कई जगहों पर पुलिस ने एहतियातन उनकी रसोई के कार्यक्रम बंद करवा दिए।
इस समय लगभग सौ स्थानों पर कांग्रेस की रसोई के माध्यम से लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें पार्टी के आईटीओ स्थित ऑफिस का किचन भी शामिल है, जहां दिल्ली के हजारों रिक्शा चालकों को दोनों वक्त मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। सोमवार से पूरी दिल्ली के हर वार्ड में उनके कार्यकर्ता सैनिटाइजेशन का काम भी शुरू करेंगे।
क्या पकता है रसोई में
दिल्ली महिला कांग्रेस की एक कार्यकर्ता कांता शर्मा ने बताया कि 'कांग्रेस की रसोई' में गरीब लोगों के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। रोज भोजन को बदल दिया जाता है। दाल-चावल, कढ़ी-चावल और हफ्ते में एक दिन पूड़ी-सब्जी दी जा रही है। इससे लोगों की भोजन की रुचि को ध्यान में रखते हुए भोजन दिया जा रहा है।