अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती, जिन्हें धोखाधड़ी के मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद अयोग्य घोषित कर दिया गया था, ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए अपील दायर की। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकलपीठ ने अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई 15 अप्रैल को निर्धारित की है।
दो अप्रैल को दिल्ली की विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने राजेंद्र भारती और जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (एआरडीबी), दतिया के तत्कालीन कर्मचारी रघुवीर शरण शर्मा (या प्रजापति) को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में तीन-तीन वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। दोनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। मामला 1998 से 2011 के बीच बैंक रिकॉर्ड्स में जालसाजी कर अवैध ब्याज भुगतान प्राप्त करने से संबंधित है। आरोप है कि भारती ने 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर अवैध रूप से ब्याज निकालने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी की और एफडी की अवधि बढ़ाई।
सजा सुनाए जाने के कुछ घंटों बाद ही मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने भारती को अयोग्य घोषित कर दिया और दतिया विधानसभा सीट को खाली घोषित कर दिया। यह कार्रवाई जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत की गई। अपील में राजेंद्र भारती ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।