एक ओर जहां पूरे देश में लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा हुआ है वहीं दूसरी ओर दिल्ली में हुए मिनी सदन के चुनाव में कांग्रेस को मात्र एक वोट से करारी हार झेलनी पड़ी है।
पिछले साल दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी और आम आदमी पार्टी से मिली करारी शिकस्त के बाद यह दूसरा मौका है जब कांग्रेस को दिल्ली में हार का मुंह देखना पड़ा हो।
कांग्रेस की इस हार के पीछे कहीं न कहीं कांग्रेस के दिग्गज नेता ही जिम्मेदार हैं। इसमें खासकर सबसे पहले नाम आता है दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला के बेटे व सांसद संदीप दीक्षित का।
भाजपा और बसपा को भी लगा झटका
कांग्रेस के दो सांसदों के मतदान करने के लिए नहीं आने के कारण कांग्रेस मंगलवार को दक्षिण दिल्ली नगर निगम की सत्ता के नजदीक पहुंचकर भी दूर रह गई।
कांग्रेस पार्षद धर्मवीर सिंह मेयर चुनाव में कांटे की टक्कर में भाजपा के खुशीराम से सिर्फ एक वोट से हार गए। इसके बाद हुए डिप्टी मेयर चुनाव में कांग्रेस पार्षद प्रवीन राणा ने जीत हासिल करके सबको चकित कर दिया। उन्होंने भाजपा समर्थित बसपा पार्षद बीर सिंह को 13 वोट से हरा दिया।
बसपा, अन्य दलों और निर्दलीय के समर्थन के चलते भाजपा के पास जीत के आंकड़े से कहीं अधिक वोट थे। मगर क्रॉस वोटिंग ने मंसूबों पर पानी फेर दिया।
लग सकती थी कांग्रेस की जीत की लॉटरी
दक्षिण दिल्ली नगर निगम के मेयर चुनाव में भाजपा पार्षद खुशीराम को 52 वोट मिले, जबकि कांग्रेस पार्षद धर्मवीर को 51 वोट मिले। एक वोट रद्द पाया गया। इस तरह वह एक वोट से हार गए।
चुनाव में सभी 101 पार्षदों व तीन सांसदों ने हिस्सा लिया। कांग्रेस के दो सांसद वोट डालने नहीं आए। कांग्रेस सांसद संदीप दीक्षित चुनाव में हिस्सा लेने उस समय पहुंचे जब मतगणना शुरू हो चुकी थी।
अगर वह 10 मिनट पहले आ जाते तो मुकाबला टाई हो जाता और मेयर बनने का फैसला लॉटरी से होता। ऐसे में कांग्रेस के हाथ बाजी लग सकती थी।
कांग्रेस के लिए ये वोट था सबसे कीमती
कांग्रेस सांसद संदीप दीक्षित के देर से पहुंचने का नुकसान तो कांग्रेस को उठाना ही पड़ा लेकिन इससे भी चौंकाने वाली एक अन्य बात है। कांग्रेस के दिल्ली से राज्यसभा सांसद परवेज हाशमी वोट डालने आ जाते तो कांग्रेस की जीत सुनिश्चित थी। चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस के पार्षद अपने दोनों सांसदों को कोसते नजर आए।
उनका कहना था पार्टी के खिलाफ देश में बने माहौल में उन्हें हर हाल में वोट डालने के लिए आना चाहिए था। कांग्रेस ने मेयर चुनाव में हुई हार का डिप्टी मेयर चुनाव में बदला लिया। कांग्रेस के प्रवीन राणा ने बसपा के बीर सिंह को करारी मात दी।
उनकी जीत का ऐलान होते सदन में कांग्रेस के नारे गूंजने लगे। उनको बधाई देने के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और कई नेता सदन में पहुंच गए। सदन में स्थायी समिति के सदस्य के लिए कांग्रेस के फरहाद सूरी और भाजपा के कुलदीप सोलंकी व राधे श्याम शर्मा निर्विरोध निर्वाचित हुए।
पूर्वी दिल्ली नगर निगम पर बीजेपी का कब्जा
पूर्वी दिल्ली नगर निगम के मेयर व डिप्टी मेयर पद पर भाजपा ने एक बार फिर कब्जा कर लिया। पूर्ण बहुमत से अधिक पार्षद होने के चलते भाजपा के पार्षदों ने दोनों पदों पर कांग्रेस के पार्षदों को हराने में कोई दिक्कत नहीं हुई।
भाजपा की मीनाक्षी कांग्रेस की तुलसी को नौ मतों से पराजित कर मेयर बनी। 33 साल की मीनाक्षी दिल्ली में सबसे कम उम्र की मेयर हैं। डिप्टी पद पर भाजपा के ही जयगोपाल वर्मा ने बाजी मारी। मेयर के लिए 60 पार्षदों ने मतदान किया, जिनमें से भाजपा उम्मीदवार मीनाक्षी को 34 वोट मिले।
कांग्रेस की तुलसी को 25 वोट ही मिले। एक वोट अवैध मिला। इसके चलते सदन की बैठक की अध्यक्षता कर रहे तत्कालीन मेयर रामनारायण दूबे ने मीनाक्षी को मेयर निर्वाचित घोषित किया। डिप्टी मेयर पद पर जय गोपाल वर्मा को कांग्रेस के आस मोहम्मद के मुकाबले में जीता हुआ मान लिया गया।