नरेंद्र मोदी की सुनामी के बावजूद नूंह से कांग्रेस विधायक एवं परिवहन मंत्री आफताब अहमद के क्षेत्र में कांग्रेस की प्रतिष्ठा बची रही।
लोकसभा के तीन जिलों में एक मेवात में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी राम धर्मपाल अपने ही विधानसभा क्षेत्र में बढ़िया नहीं कर पाए।
राव धर्मपाल बादशाहपुर से कांग्रेस विधायक हैं। यहां उन्हें करीब 22 हजार वोट मिले हैं। जबकि इतना ही वोट बटोरने में ‘आप’ के योगेंद्र यादव भी सफल रहे। उन्हें इस क्षेत्र से तकरीबन साढ़े 21 हजार वोट मिले।
बसपा प्रत्याशी को भी पीछे छोड़ा
कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव में खुद को स्थानीय उम्मीदवार होने को बड़ा मुद्दा बनाया था। इसके अलावा प्रचार के अंतिम दिन फिल्मी सितारे भी शहर में घुमवाए।
इसके बावजूद वह ‘आप’ से शहर में पीछे रहे। दोनों के बीच वोटों का अंतर करीब 10 हजार का है। यादव बहुल बावल और रेवाड़ी में भी कांग्रेस प्रत्याशी अपनी बिरादरी को नहीं रिझा पाए। वहां भी इनका प्रदर्शन फीका रहा। सोहना में तो कांग्रेस का प्रदर्शन कुछ अधिक ही चिंताजनक रहा।
इस क्षेत्र से पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता आते हैं। वह जिला ग्रामीण के अध्यक्ष भी हैं और सोहना से टिकट के दावेदार भी। लेकिन यहां कांग्रेस प्रत्याशी वोट के मामले में बसपा के धर्मपाल राठी से पीछे रहे। राठी को 15816 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 8712 मत ही मिले।
इंद्रजीत ने फिर दी जाकिर को पटखनी
मेवात में दो सियासी घरानों का बड़ा दबदबा रहा है। एक है चौधरी खुर्शीद अहमद और दूसरे हैं चौधरी तैयब हुसैन। उनकी ही सियासी विरासत संभालने में लगे हैं खुर्शीद के पुत्र आफताब अहमद और तैयब के पुत्र जाकिर हुसैन।
जाकिर को चुनावों में लगातार हार मिल रही है। पिछला लोकसभा चुनाव उन्होंने बसपा के टिकट पर लड़ा था और राव इंद्रजीत सिंह से हार गए थे।
इस दफा उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन इसमें वे विफल रहे। जबकि मेवात के कांग्रेस जिलाध्यक्ष की हैसियत से आफताब अहमद का चुनाव में प्रदर्शन सराहनीय माना जा रहा है।