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कांग्रेस के एक और कद्दावर नेता भाजपा में!

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कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य और हरियाणा के कद्दावर नेता चौधरी बिरेंद्र सिंह जल्द ही भाजपा में शामिल होंगे। इसकी औपचारिक घोषणा के लिए सिंह और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के मुलाकात का कार्यक्रम तय किया जा रहा है।
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सिंह भाजपा में बिना शर्त शामिल होंगे। कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा का दामन थामने के लिए चौधरी बिरेंद्र सिंह की भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह से पहले ही मुलाकात हो चुकी है।

इसके बाद उन्होंने राज्य के प्रभारी प्रो जगदीश मुखी, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कैप्टन अभिमन्यु सहित कई अन्य नेताओं से मुलाकात की है। भाजपा भी चाहती है कि इसी साल के अंत में राज्य में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले उसके हाथ कोई कद्दावर जाट नेता हाथ लगे।
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भाजपा को होगा बड़ा फायदा

पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि जिस प्रकार लोकसभा चुनाव से पूर्व यादव बिरादरी के राव इंद्रजीत सिंह का कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थामने से चुनावी लाभ मिला, उसी प्रकार चौधरी बिरेंद्र के भी भाजपा का दामन थामने से विधानसभा चुनाव में पार्टी को बड़ी सफलता हाथ लगेगी।

हालांकि पार्टी ने राज्य में किसी को बतौर मुख्यमंत्री उम्मीदवार पेश नहीं करने का फैसला किया है। अरसे से राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर सीधा हमला बोलने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चौधरी बिरेंद्र सिंह जल्द भाजपा में शामिल होंगे।

पार्टी के अतिविशिष्ट सूत्रों ने बताया कि लोकसभा चुनाव नतीजे आने के बाद से ही इस मामले में चल रही बातचीत सफल रही है। बिरेंद्र सिंह को पार्टी में शामिल कराने के लिए उनकी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है।

उक्त सूत्र ने बताया कि पहले सिंह चाहते थे कि भाजपा उन्हें विधानसभा चुनाव में बतौर मुख्यमंत्री उम्मीदवार पेश करे। पार्टी नेतृत्व ने उनकी इस शर्त को स्वीकार नहीं किया था। बाद में चौधरी बिरेंद्र सिंह बिना शर्त भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार हो गए। हालांकि इसके लिए उन्होंने केंद्र और प्रदेश के नेताओं से कई दौर की बातचीत की।
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मोदी लहर के बावजूद यहां फिसड्डी है भाजपा

उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में मोदी लहर की बदौलत राज्य की 10 में से 7 सीटों पर कब्जा करने वाली भाजपा विधानसभा चुनाव में स्थानीय कद्दावर नेता का टोटा झेल रही है।

पार्टी ने हालांकि हरियाणा, महाराष्ट्र झारखंड और जम्मू कश्मीर में एक बार फिर से मोदी के ही नाम पर वोट मांगने का फैसला किया है। मगर अंदरखाने पार्टी कमजोर सीटों पर विरोधी दलों के नेताओं को साधने और चुनाव से पहले विरोधी दलों के बड़े नेताओं को तोड़ने की भी रणनीति बनाई है।

पार्टी ने हरियाणा में ऐसी 40 सीटों को चिन्हित किया है, जहां उसे ताकतवर उम्मीदवार नहीं मिल रहे। उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी को राज्य की 55 विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल हुई थी। मगर पार्टी मानती है कि यह बढ़त उसे महज मोदी के नेतृत्व के कारण हासिल हुई थी।
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