आईसीएमआर ने पूरे देश में अप्रैल माह में सर्वे किया था जिसमें 0.07 फीसदी से भी कम आबादी में एंटीबॉडी मिले थे। इसी के तहत दिल्ली के दक्षिणी पूर्वी जिले में भी सीरो सर्वे किया गया था लेकिन यहां का परिणाम सबसे ज्यादा था जिसके चलते दिल्ली में बड़े स्तर पर सीरो सर्वे की जरूरत महसूस हुई।
इसके बाद पहली बार इतनी तादाद में किसी राज्य या महानगर की 23.48 आबादी में कोरोना संक्रमण होने की पुष्टि हुई है।एंटीबॉडी की जांच सिर्फ महामारी के प्रबंधन को समझने के लिए जरूरी है। इसका मरीज के उपचार से कोई लेना देना नहीं है। दिल्ली में अधिकांश जनसंख्या का अनुपात संवेदनशील है। इसलिए लोगों को मास्क, शारीरिक दूरी और बार-बार हाथ धोने की आदत पर विशेष ध्यान देना होगा।
केंद्र व दिल्ली ने कसी थी कमर
पिछले महीने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की निगरानी में केंद्र और दिल्ली ने मिलकर कोरोना वायरस के खिलाफ कमर कसी थी। इसी दौरान गृहमंत्री ने राजधानी में सीरो सर्वे करने का आदेश दिया था ताकि यह पता चल सके कि दिल्ली की कितनी आबादी तक संक्रमण का प्रसार हो चुका है।
लॉकडाउन का फायदा, 77 फीसदी आबादी अभी भी सुरक्षित
डॉ. सुजीत कुमार सिंह ने कहा, समय पर लॉकडाउन का नतीजा है कि दिल्ली में अभी भी 77 फीसदी आबादी में कोरोना वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि इसमें बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं व कमजोर इम्युनिटी के लोग शामिल हैं। इसलिए इस आबादी को सतर्कता की जरूरत है। समय पर लॉकडाउन से दिल्ली में संक्रमण का काफी हद तक फैलाव नहीं हो सका।
सीरो सर्वे 18 जून की तस्वीर
एनसीडीसी के अनुसार सीरो सर्वे की यह तस्वीर बीते 18 या 19 जून की है। क्योंकि संक्रमित होने के बाद शरीर में एंटीबॉडी बनने में कुछ वक्त लगता है। 27 जून से सैंपलिंग शुरू हुई थी। इसलिए यह कहा जा सकता है कि दिल्ली में पिछले महीने ऐसे हालात थे। हालांकि पिछले 15 दिन में रोजाना आ रहे सुधार से उम्मीद जताई जा रही है कि फिलहाल दिल्ली में हालात और भी अधिक सामान्य हो सकते हैं। संभावना यह भी है कि जल्द ही दोबारा इस तरह का सर्वे किया जा सकता है।