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पहले ही दिन हेल्पलाइन पर हजारों शिकायतें

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भ्रष्टाचार से निपटने के लिए रविवार से शुरू हुए हेल्पलाइन नंबर 1031 पर पहले ही दिन शिकायतों का अंबार लग गया। पहले ही दिन 24 घंटे में 12,731 लोगों ने शिकायतें दर्ज कराईं। दिल्ली सरकार का कहना है कि सभी कॉल की जांच करने के बाद उसे भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को भेजा जाएगा।
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पहले दिन की सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, हेल्पलाइन खुलते ही कॉल आने लगी। पहले तीन घंटे में करीब 5000 लोगों ने कॉल किया। 24 घंटे मेें 12000 से ज्यादा लोग कॉल कर चुके हैं। सरकार का कहना है कि हमारी पहली कोशिश है कि आने वाले सभी कॉल को रिसीव किया जा सके, फिर उनकी जानकारी पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए। रिपोर्ट के अनुसार, पहले दिन लोगों ने परिवहन विभाग, जल बोर्ड, नगर निगम और पुलिस समेत अन्य विभाग की शिकायत दर्ज कराई।

नंबर का पूरी दिल्ली में प्रचार-प्रसार
हेल्पलाइन नंबर 1031 की होर्डिंग पूरे शहर में लगा दी गई है। इसमें केजरीवाल को भी दिखाया गया है। सरकार अपने इस प्रयास को जनता तक पहुंचाने के लिए प्रचार के सभी तरीकों का इस्तेमाल कर रही है। सोमवार सुबह से ही एफएम रेडियो हो या फिर शहर की प्राइम लोकेशन पर मौजूद होर्डिंग्स वहां भ्रष्टाचार का हेल्पलाइन नंबर और केजरीवाल ही नजर आ रहे हैं। वहीं सूत्रों का कहना है कि इस उपलब्धि के जरिये पार्टी के भीतर जारी घमासान को शांत दिखाने की भी यह कोशिश है।
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सिर्फ स्टिंग, हेल्पलाइन से नहीं रुकेगा भ्रष्टाचार

‘मोबाइल से स्टिंग करके उसकी जानकारी हेल्पलाइन नंबर पर दीजिए। बस आप का काम खत्म, फिर सरकार उस भ्रष्टाचारी को नहीं छोड़ेगी।’ केजरीवाल सरकार के यह दावे सुनने में तो बहुत अच्छे लगते हैं मगर जमीनी हकीकत इससे काफी उलट है।

यह हम नहीं, इसी ‘आप’ की पिछली सरकार के दौरान जारी हेल्पलाइन नंबर पर आए शिकायती कॉल और उस पर हुई कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं। जिसमें 49 दिनों के दौरान एक लाख से ज्यादा शिकायती कॉल में से महज एक को ही एफआईआर में तब्दील कर पाई।

वर्ष 2013-14 में ‘आप’ की 49 दिन की सरकार के दौरान भी 1031 हेल्पलाइन नंबर जारी किया था। उस दौरान भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को इस नंबर पर कुल 1.20 लाख कॉल आए थे। जिसमें से महज 4000 भ्रष्टाचार से संबंधित थी।
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सिस्टम में सुधार की जरूरत

जांच में पता चला कि बहुत सारी ऐसी कॉल थीं जिस पर आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इस दौरान महज एक एफआईआर दर्ज हुई। जिसमें पुलिस के  एक हवलदार के खिलाफ  केस दर्ज हुआ। अभी तक उसको गिरफ्तार तक नहीं किया गया है। उसकी आवाज के नमूने एफएसएल जांच के लिए भेजा गया है।

एसीबी सूत्रों के मुताबिक, उस दौरान दी गईं कॉलों में से 90 प्रतिशत पुलिस के खिलाफ थी। एसीबी ने 300 शिकायतों की रिकॉर्डिंग जांचने के लिए सीडी आदि को एफएसएल भेजा है। इसके परिणाम आने में महीनों लग गए। जानकारों का कहना है कि दोषियों पर कार्रवाई में तेजी लाने के लिए सरकार को हेल्पलाइन के अलावा कानूनी पहलुओं की रिपोर्ट, एफएसएल की रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने के लिए काम करें। इससे शिकायतों के निपटारे में तेजी आएगी।
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