आम आदमी पार्टी में सदस्यों द्वारा चिट्ठियां लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। इसी सिलसिले में आम आदमी पार्टी की पूर्व प्रवक्ता आतिशी मारलेना ने पार्टी के एक वरिष्ठ नेता को चिट्ठी लिखी है।
इस चिट्ठी में आतिशी ने प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के पार्टी से अलग हो जाने की वजह का खुलासा किया है। मारलेना ने अपनी चिट्ठी में दावा किया है कि जो पार्टी इस समय दो धड़ों में बंट चुकी है वो असल में साथ आने ही वाली थी।
लेकिन प्रशांत भूषण के साथ कुछ ऐसा हुआ कि पूरे मामले ने एक नया मोड़ ले लिया। असल में प्रशांत भूषण के अलग होने की वजह यह नहीं थी कि पार्टी अपने सिद्धांतों पर काम नहीं कर रही थी बल्कि उनके पिता शांति भूषण उन्हें 'ना' कह दिया था।
'संजय सिंह ने सहमति बनाने की पूरी कोशिश की थी'
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार आतिशी मारलेना ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि पार्टी नेता संजय सिंह ने आप में मची कलह को शांत करने और पार्टी नेतृत्व के बीच पारस्परिक सहमति बनाने का भरसक प्रयास किया था।
वह लिखती हैं कि, 'यह बात जनता और वॉलेंटियर्स नहीं जानते कि संजय सिंह ने पार्टी में किसी एक बात पर सबकी सहमति बनाने के लिए हर तरह की कोशिश की।'
'सराहनीय रूप से संजय भाई 26 मार्च तक पार्टी नेतृत्व को सामूहिक रूप से माफी मंगवाने में भी कामयाब हो गए थे। इसके तहत पृथ्वी जी के नेतृत्व में कई बदलाव की बात थी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 6 नए सदस्यों के चयन की बात भी थी।'
शांति भूषण की इस बात से पार्टी में हुए दो फाड़
आतिशी ने अपनी चिट्ठी में प्रशांत भूषण को संबोधित करते हुए लिखा है कि जब उन्हें प्रशांत जी के पार्टी से अलग होने का कारण पता चला तो वो चकित रह गईं।
आतिशी ने लिखा, 'प्रशांत जी आपने पार्टी द्वारा दिए गए प्रस्ताव को इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि आपके पिता शांति भूषण जी ने ना कह दिया था!'
'वही प्रशांत भूषण जो देश में कई मजबूत शक्तियों के खिलाफ खड़े रहे वो अपनी पार्टी हित के लिए सिर्फ इसलिए खड़े नहीं रहे क्योंकि उनके पिता ने घर छोड़ने की बात कह दी थी।' हालांकि जब प्रशांत भूषण से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि शांति भूषण पर लगाए गए आरोप गलत हैं। प्रशांत ने कहा कि शांति को सुलह के बदले धोखे का अंदेशा था।
'पार्टी में हैं कुछ कमियां'
कहा जाता है कि भूषण ने कहा था कि वो गलत होने पर अपने पिता की बात को मानने से इंकार भी कर सकते हैं। लेकिन उन्हें ऐसा लगा कि केजरीवाल के बारे में उनके पिता की राय सही है और इसलिए प्रशांत ने शांति भूषण की बात मान ली।
हालांकि एक और बात ध्यान देने वाली है कि प्रशांत पर सवाल खड़े करने वाली आतिशी मारलेना अपनी चिट्ठी में इस बात को स्वीकार करती हैं कि पार्टी के संगठन और कार्यप्रणाली में कुछ कमियां तो हैं।
इस ओर संकेत करते हुए उन्होंने लिखा भी है कि हमें प्रयास करना चाहिए कि हम पार्टी के मूल्यों को बचाए रखें। अपने पत्र में आतिशी ये भी लिखती हैं कि प्रशांत ने जो भी सवाल पार्टी के संगठन को लेकर उठाए वो हमेशा अपनी जगह पर सही थे।
प्रशांत-योगेंद्र पर आतिषी ने उठाए सवाल
आतिशी प्रशांत की जिस बात से असहमत हैं वो उनके सवाल उठाने का तरीका और पार्टी को ऐसी गंभीर क्राइसिस की स्थिति में ला देना है।
आतिशी का कहना है कि जब संजय सिंह द्वारा किए जा रहे सभी प्रयास विफल रहे तो प्रशांत भूषण ने जनता में जाकर कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि केजरीवाल कैंप सुलह को लेकर गंभीर नहीं था।
प्रशांत भूषण के मुताबित सिद्धांतों की लड़ाई के चलते पार्टी को जोड़े रखने के प्रयास विफल हुए लेकिन उन्होंने अपने पिता की इच्छा की बात जनता को नहीं बताई जिससे जनता गुमराह हुई और उसका भरोसा पार्टी से उठ गया।
मारलेना की चिट्ठी के अनुसार जो लोग उन्हें जानते हैं वो केजरीवाल कैंप और भूषण कैंप द्वारा कही जा रही बातों में हमेशा निष्पक्ष रहे और किसी भी खेमे के साथ नहीं रहे।
आतिशी लिखती हैं कि, उनके दिल में प्रशांत और योगेंद्र दोनों के लिए सम्मान रहेगा। लेकिन उन्हें अब यह भरोसा नहीं है कि उनकी राहें इन दोनों नेताओं की राहें एक होंगी। वो ये भी कहती हैं कि उन्हें उम्मीद है कि ये दोनों नेता अपनी राहें इतनी अलग नहीं करेंगे कि उन्हें इन दोनों के आमने-सामने खड़े होना पड़ेगा।