दिल्ली में हुए 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए लाइट खरीद घोटाला मामले में सीबीआई अदालत ने पांच दोषियों के खिलाफ सजा सुनाई है।
अदालत ने एमसीडी के 5 कर्मियों में 4 लोगों को 4-4 साल की कैद की सजा सुनाई जबकि मुख्य आरोपी टीपी सिंह को 6 साल की कैद की सज सुनाई है।
फैसला आने के बाद बचाव पक्ष के वकील अमरदीप सिंह ने कहा है कि वे अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करेंगे और सजा को सस्पेंड करवाने की कोशिश करेंगे।
गौरतलब है कि अदालत में सात दोषियों की सजा पर मंगलवार को बहस पूरी हो गई थी। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों के साथ नरमी न बरत कर अधिकतम सजा दी जानी चाहिए।
साजिश से सरकार को हुआ नुकसान
इससे पहले अदालत ने दोषियों की सजा पर फैसला बुधवार तक सुरक्षित रख लिया
था। अदालत ने आरोपियों को अपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा व
भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत सोमवार को दोषी ठहरा चुकी है।
सीबीआई के
मुताबिक, दोषियों ने निजी फायदे के लिए साजिश रची थी। जिससे सरकारी कोष को एक करोड़ चालीस लाख रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई की ओर से अधिवक्ता प्रणीत शर्मा ने दोषियों की सजा पर बहस की।
उधर, बचाव पक्ष के वकीलों ने नरमी बरतने का आग्रह करते हुए कहा कि आरोपियों का पिछला कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। केस की सुनवाई के दौरान आरोपी ग्यारह महीने हिरासत में काट चुके हैं।
तीस हजारी स्थित विशेष सीबीआई जज बृजेश गर्ग ने अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलें सुनीं। अदालत ने 124 पन्नों के अपने निर्णय में आरोपियों को दोषी ठहराया।
उन्होंने कहा कि सीबीआई के गवाहों के बयानों से यह साबित होता है कि दोषियों ने अपनी निजी फायदे के आपराधिक साजिश रची, जिससे सरकार को नुकसान हुआ।
ये ठहराए गए थे दोषी-
एमसीडी अधीक्षक अभियंता डीके सुगान, कार्यकारी अभियंता ओपी माहला, एकाउंटेंट राजू वी. आनंद, टेंडर क्लर्क गुरचरण सिंह, निजी कंपनी स्वेस्का पावरटेक इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड व उसके महानिदेशक टीपी सिंह व निदेशक जेपी सिंह को अदालत सोमवार को दोषी ठहरा चुकी है।