सिविल अस्पताल प्रशासन ने यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चों के लिए बनाए गए सुकून वार्ड से सामान्य मरीजों को निकलवाकर इसे खाली करवा दिया है।
वार्ड के बेड किसकी अनुमति से सामान्य मरीजों को दिए जाते थे और कौन कर्मचारी इस गोरखधंधे में शामिल हैं, इसकी जांच शुरू कर दी गई है।
सुकून वार्ड के बेड पांच सौ रुपये में बेचे जाने की खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है।
सिविल अस्पताल के प्रथम तल पर प्रसव वार्ड के पास ही यौन हिंसा के शिकार बच्चों के इलाज और काउंसलिंग के लिए सुकून वार्ड बना है।
आरोप है कि प्रथम तल पर तैनात नर्सिंग स्टाफ की कुछ सदस्य और कैंटीन संचालिका की मिलीभगत से इस वार्ड के तीन बेड पांच सौ रुपये प्रतिदिन की दर से किराये पर उठाए जाते हैं।
अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के बाद अमर उजाला ने इसकी सच्चाई का पता लगाया। इस वार्ड में तीन दिन के लिए रुकी नेपाली महिला और उसके परिवार ने बताया था कि उनसे छह हजार रुपये लिए गए थे।
इसके अलावा अन्य मरीजों ने भी एक हजार से पांच सौ रुपये बेड प्रतिदिन की दर से भुगतान करने की बात बताई थी। वार्ड में भर्ती लोगों ने बताया था कि बेड दिलाने का काम वार्ड की कैंटीन संचालिका करवाती है।
अमर उजाला ने अस्पताल में चल रहे इस गोरखधंधे को शुक्रवार को ही उजागर किया था। खबर छपते ही नर्सिंग स्टाफ और कैंटीन संचालिका के खिलाफ शिकायत करने वाले कई लोग सामने आए।
जच्चा-बच्चा वार्ड में भर्ती महिलाओं के परिजनों ने आरएमओ डॉ.नवीन गर्ग से शिकायत की कि दूध गर्म करने के लिए पांच रुपये निर्धारितहैं, लेकिन उससे दस रुपये लिए जाते हैं।
ब्रेड सेंकने के भी शुल्क लिए जाते हैं। कोई तीमारदार यदि सवाल करता है तो मरीज को बाहर निकलवाने की धमकी देते हुए उसके साथ अभद्रता की जाती है।
उधर वार्ड में भर्ती जच्चा-बच्चा को पोस्ट नेटल वार्ड भिजवा कर वार्ड खाली कराया गया। आरएमओ डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि मामले की जानकारी पीएमओ और सीमएओ को दी गई है।