देश में सहिष्णुता खत्म होने की बात कह साहित्य, सामाजिक क्षेत्र और फिल्म जगत के लोगों में पुरस्कार लौटाने की होड़ मची हुई है। इसी मुद्दे पर शुक्रवार को शहर के सेक्टर-4 स्थित सीसीए स्कूल में कई क्षेत्रों के विद्वानों ने परिचर्चा की।
इसमें सम्मान लौटाने वालों को खरी-खोटी सुनाई गई। संस्कार भारती की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पुरस्कार वापसी को राजनीति बताया गया।
फिल्म निर्माता रमा पांडे ने कहा कि पुरस्कार लौटाना अंतिम अस्त्र नहीं है। इसे लौटाने की होड़ में शामिल लोग देश को बांटने जैसा काम कर रहे हैं। वह देश को दुनिया भर में बदनाम कर रहे हैं। यह निंदनीय है।
परिचर्चा में विद्वानों ने कहा कि सम्मान साहित्य सृजन का है। इसे लौटाना पूरी अकादमी व अपने सृजन का अपमान है। रमा पांडे ने कहा कि आज से पहले इन साहित्यकारों की संवेदनाएं क्यों नहीं आहत हुईं।
व्यास सम्मान से अलंकृत साहित्यकार चंद्रकांत ने कहा कि देश में पहले भी काफी बड़ी-बड़ी घटनाएं हुईं हैं तब किसी ने सम्मान वापसी की बात नहीं की। यह बात समझ में नहीं आ रही है।
फिल्मकार कर्नल जेके सिंह ने कहा कि इन पुरस्कारों को लौटाने वालों ने अपने साथ काम करने वाले सह-कलाकारों और इन्हें पसंद करने वाली जनता से इसके बारे में पूछा है क्या।
यह फिल्म जगत का अपमान है। साहित्यकार घमंडीलाल अग्रवाल ने सम्मान लौटाने वालों पर व्यंग्य करते हुए कहा कि कलम सदा कायम रखो, कलम न देना बेच, अगर कलम दी बेच, तो उलटे पड़ेंगे पेच। चित्रकार त्रिपुरारी ने चित्र बनाकर सम्मान लौटाने वालों का विरोध किया।