एक वर्षीय एमए राजनीति विज्ञान में दाखिले का मामला
शिकायत निवारण समिति को कारण सहित आदेश जारी करने का निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की शिकायत निवारण समिति को एक वर्षीय एमए राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम के दाखिले से जुड़े विवाद पर तीन दिन के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया है। यह मामला 2026-27 शैक्षणिक सत्र में अपनाई गई प्राथमिकता व्यवस्था से संबंधित है। याचिकाकर्ता शिवा सिंह ने इस व्यवस्था को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने यह आदेश शिवा सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। शिवा सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत बीए के चार वर्षीय कार्यक्रम में दाखिला लिया था। उन्होंने इकनॉमिक्स और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की थी, जिसमें राजनीति विज्ञान उनका मुख्य विषय था। उनके अनुसार, चार वर्षीय बीए पूरा करने के बाद वह एक वर्षीय एमए राजनीति विज्ञान में दाखिला ले सकते थे। डीयू ने 4 जुलाई को एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए सूचना पुस्तिका जारी की थी। इसमें संबंधित विषय में ऑनर्स किए हुए छात्रों को प्राथमिकता देने का प्रावधान था। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस व्यवस्था से मुख्य विषय के रूप में पढ़ने वाले छात्रों को नुकसान हुआ। याचिका में यह भी दावा किया गया कि कुछ ऐसे छात्रों को भी दाखिला मिला, जिनके अंक याचिकाकर्ता से कम थे।
हाईकोर्ट ने कहा कि डीयू की दाखिला पुस्तिका में ऐसी शिकायतों के निपटारे के लिए शिकायत निवारण समिति का प्रावधान है। कोर्ट ने समिति को पूरे मामले पर विचार करने का निर्देश दिया। समिति को तीन दिन के भीतर कारण सहित आदेश जारी करना होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता या अन्य प्रभावित छात्र समिति के फैसले से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे कानून के अनुसार उस फैसले को चुनौती दे सकते हैं।