हिंडन नदी में बहता फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी।
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हिंडन नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर एनजीटी की तरफ से गठित न्यायमूर्ति एसयू खान की अध्यक्षता वाली अनुश्रवण समिति ने चिंता जाहिर की है। बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट सभागार में छह जिलों के डीएम, सीएमओ व अन्य अधिकारियों की साथ कमेटी ने दूषित जल, उससे होने वाली बीमारियों व बचाव को लेकर चर्चा की। कमेटी ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिया कि हिंडन नदी से प्रभावित गांवों में मेगा चिकित्सा कैंप लगाया जाए, जिसका 25 मई तक अखबार में विज्ञापन दें दिया जाए। इसके बाद कैंप में आने वाले बीमार मरीजों की समस्त पैथोलॉजिकल जांच कराई जाए।
बैठक में समिति ने मुजफ्फरनगर व गाजियाबाद के सीएमओ से पूछा कि आपके जिले में कैंसर के कितने मरीज मिले हैं। मुजफ्फरनगर के सीएमओ ने कहा कि नौ कैंसर मरीज सामने आए, जिनमें से चार लोगों को तंबाकू खाने के चलते कैंसर हुआ। वहीं, गाजियाबाद के सीएमओ ने कहा कि हमारे यहां 41 गांव प्रभावित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा लोग दूषित पाने के चलते लीवर व पेट की बीमारी से पीड़ित है। बीते महीने भी 2500 मरीज सामने आई। इनमें से काफी को त्वचा से संबंधित बीमारी भी थी। उधर, जल निगम के अधिकारियों ने समिति के सामने जानकारी दी कि हिंडन से सटे 148 गांव हैं, जिसमें 9915 हैंडपंप हैं। इनमें से 8782 हैंडपंप के पानी की जांच हुई है, जिनमें से 1088 का पानी दूषित पाया गया है। रिपोर्ट के बाद 866 हैंड पंप को उखाड़ दिया है। शेष को उखाड़ने का काम चल रहा है।
वहीं, 41 गांवों में वाटर सप्लाई की व्यवस्था की जा चुकी है। वहीं, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि कुल 124 उद्योगों को मानक के अनुरूप नहीं मिलने पर चेतावनी जारी की गई है। इनमें से 28 को नोटिस भी जारी किया गया है। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी ने कहा कि सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली इकाई शुगर मिल, पेपर मिल और बूचड़खाने हैं, जिन पर लगातार नजर रखी जा रही है। उधर, नोएडा के डीएम बीएन सिंह ने कमेटी के सामने प्रस्ताव रखा कि हिंडन से सटे डूब क्षेत्र में जमकर जमीन की खरीद बिक्री हो रही है। बिल्डर प्लाट बेंच रहे हैं और सब रजिस्ट्रार धड़ल्ले से रजिस्ट्री भी कर रहे हैं। उस पर रोक लगनी चाहिए, क्योंकि आज हिंडन आठ -10 मीटर में बह रही है। आसपास पास कहीं पर एसटीपी लगाने की जगह भी नहीं बची है।