रुपयों के साथ अपनों का संदेश पाने की बेसब्री अब इतिहास बन गई है। डाक विभाग की सर्वाधिक लोकप्रिय योजना रही मनीआर्डर सेवा एक अप्रैल से बंद हो गई। इंटरनेट और मोबाइल सर्विस के दौर में 135 साल पुरानी यह सेवा ने अपना वजूद खो दिया।
डाक विभाग ने 1880 में इसकी शुरुआत की थी। देश के 155000 डाकघरों से लोग इसका फायदा उठा रहे थे। डाक विभाग ने एक अप्रैल से मनी ट्रांसफर की इलेक्ट्रानिक सर्विस शुरू कर दी है।
डाक विभाग ने 1880 में मनीआर्डर सेवा शुरू की थी। इसमें व्यक्ति को एक फार्म मिलता था। फार्म में धनराशि भरने के साथ ही अपनों लिए संदेश लिखने का एक स्थान होता था। डाकिया रुपयों के साथ उस संदेश को लेकर घर पहुंचता था। लोगों को इसका बेसब्री से इंतजार रहता था।
डाकघरों में अब इलेक्ट्रानिक मनीआर्डर और इंस्टैैंटमनी आर्डर स्कीम शुरू की है। इलेक्ट्रानिक मनीआर्डर से एक रुपये से लेकर पांच हजार तक और इंस्टैंटमनी आर्डर से एक हजार से 50 हजार तक रुपये भेजे जा सकते हैं। इससे लोगों के परिजनों को रुपये तो जल्द मिल जाएंगे, लेकिन अपनों का प्यार भरा संदेश नहीं मिल सकेगा।
एनसीआर में थी जरूरत
बदलते जमाने में मोबाइल और इटरनेट की मनी ट्रांसफर स्कीमों ने लोगों को लुभाना शुरू कर दिया, लेकिन दिल्ली-एनसीआर में इसकी उपयोगिता अभी भी थी। यहां पूर्वांचल के गरीब लोगों की बड़ी संख्या है।
ये इंटरनेट-मोबाइल बैंकिंग का प्रयोग करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में इनको मनीआर्डर का ही सहारा था। डाक विभाग के अनुसार एनसीआर में हर महीने पांच लाख से ज्यादा लोग इसका प्रयोग करते थे।
डाक विभाग के उप महानिदेशक वित्त शिखा माथुर कुमार ने मनीआर्डर सेवा बंद करने का आदेश जारी किया है। उन्होंने मनीआर्डर के 135 साल केसुहाने सफर का भी भावुक स्मरण किया है। अब लोगों को मनीआर्डर की परंपरागत प्रक्रिया का लाभ नहीं मिल सकेगा।
- ज्ञानेंद्र चौधरी, रीजनल सर्विस मैनेजर डाक विभाग।