सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू किया गया तो महज 14 दिन में जल निगम की 44 साल पुरानी कालोनी ध्वस्त हो जाएगी।
ग्रीन बेल्ट पर बनी जल निगम की आवासीय कालोनी, दफ्तरों और स्टोर रूम को हटाने के लिए 28 सितंबर तक का समय दिया है। जीडीए ने इस पर कार्रवाई करते हुए जल निगम की लीज रद्द कर दी।
उधर, जल निगम के अधिकारी कालोनी और दफ्तरों को बचाने के लिए कोर्ट से स्टे लेने की जुगत में लगे हैं। राजनगर सेक्टर-1 निवासी जगवती गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए 30 अगस्त को ही सुप्रीम कोर्ट ने 1961 का ले-आउट प्लान बहाल करने के आदेश दिए हैं।
जीडीए ने भी 28 सितंबर तक जमीन खाली करने के लिए जल निगम को नोटिस जारी कर दिया है। जमीन खाली न करने पर जीडीए ने निर्माण को ध्वस्त करने की चेतावनी दी है।
कोर्ट के आदेश जारी हुए 15 दिन बीत गए हैं, लेकिन जल निगम ने कालोनी को खाली करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की। जल निगम के अधिकारी कालोनी तोड़ने पर स्टे लेने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
मगर फिलहाल उन्हें राहत नहीं मिली है। ऐसे में कालोनी में रहने वाले 90 परिवारों में भी आशियाना टूटने की दहशत बनने लगी है।