राजधानी में सर्दी इस बार जल्दी दस्तक दे रही है और इसका सीधा असर बिजली की मांग पर दिख रहा है। ऐसे में 16 से 30 नवंबर के बीच दिल्ली में बिजली खपत ने पिछले पांच वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस पखवाड़े में पीक मांग 4,486 मेगावाट तक पहुंची, जो नवंबर महीने में अब तक की सबसे अधिक मांग है। टाटा पावर-डीडीएल के इलाकों में भी कुछ ऐसा ही स्थिति देखने को मिली। यहां इस सीजन में विंटर पीक डिमांड 1,455 मेगावाट दर्ज की गई, जो पिछले वर्षों के मुकाबले काफी ज्यादा है।
भारतीय मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि इस साल दिल्ली में ठंड पिछले वर्षों से ज्यादा पड़ेगी। इसी वजह से राजधानी में कुल बिजली मांग 6,000 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। यह आंकड़ा पिछले साल की अधिकतम मांग 5,655 मेगावाट से भी ऊपर होगा। टाटा पावर-डीडीएल के मुताबिक बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। हमने अपनी दीर्घकालिक पार्टनरशिप के चलते पर्याप्त बिजली की व्यवस्था की है और हमारे पास विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध एनर्जी मिक्स है जिसमें 14 फीसदी सोलर, 17 फीसदी हाइड्रो, 2 फीसदी विंड, 1 फीसदी वेस्ट-टू-एनर्जी, 2 फीसदी न्यूक्लियर और 65 फीसदी थर्मल स्रोत शामिल हैं।
टाटा पावर-डीडीएल के मुताबिक इस सीजन में उत्तरी और उत्तरी दिल्ली में टाटा पावर-डीडीएल की पीक डिमांड बढ़कर 1,859 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि पिछले साल पीक डिमांड 1,739 मेगावाट रही थी, जिसे डिस्कॉम द्वारा सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। टाटा पावर-डीडीएल अपने बिहेवियरल डिमांड रिस्पॉन्स प्रोग्राम के जरिए उपभोक्ताओं को जिम्मेदारी के साथ बिजली उपयोग के लिए प्रेरित कर रहा है। इस कार्यक्रम में 1.30 लाख उपभोक्ता जुड़े हैं और हर साल करीब 450 मेगावाट की बचत होती है।
यह पहल ग्रिड को मजबूत बनाने के साथ देश के जलवायु लक्ष्यों में भी मदद करती है। कंपनी ने सर्दियों में कोहरे और कम तापमान की वजह से बढ़ने वाली चुनौतियों को देखते हुए अपने सभी महत्वपूर्ण इंस्टॉलेशनों की सुरक्षा और मेंटेनेंस पर भी खास ध्यान दिया है। सुबह के समय जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है, कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे गैर-जरूरी उपकरण बंद रखें और बिजली का जिम्मेदारी से उपयोग करें ताकि ग्रिड स्थिर बना रहे।