नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने एअर इंडिया द्वारा विमान लीजिंग में कथित अनियमितताओं के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट पर संज्ञान लिया। अदालत ने संस्था सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) को नोटिस जारी किया है। अदालत अब 12 मार्च 2026 को यह तय करेगी कि क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया जाए या जांच आगे बढ़ाई जाए। यह मामला 29 मई 2017 को दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दर्ज किया था। जनहित याचिका में पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल के कार्यकाल के दौरान विमान लीजिंग फैसलों में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। सीबीआई ने 2024 में विमान लीजिंग से संबंधित चार मामलों में से एक में अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
प्राथमिकी के अनुसार, 2006 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नेशनल एविएशन कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएसीआईएल) के अधिकारियों ने निजी कंपनियों के साथ मिलकर बिना उचित रूट स्टडी, मार्केटिंग विश्लेषण और मूल्य निर्धारण रणनीति के ड्राई तथा वेट लीज पर विमान लेने का फैसला किया। आरोप था कि एअर इंडिया ने 2006 से पांच वर्षों के लिए चार बोइंग-777 विमान ड्राई लीज पर लिए, जबकि जुलाई 2007 से कंपनी को अपने विमान मिलने वाले थे। जांच में पाया कि 2007 से 2009 के बीच पांच बोइंग-777 और पांच बोइंग-737 विमान खाली खड़े रहे, जिससे करीब 840 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। लीज समझौतों में समय से पहले समाप्ति का प्रावधान न होने से उन्हें रद्द करना महंगा पड़ा। साथ ही, प्रशिक्षित पायलटों की कमी के बावजूद 15 महंगे विमान लीज पर लिए गए। बाद में एअर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के विलय के बाद 2007 में सेल-एंड-लीजबैक योजना लागू की गई।