अरावली की वादियों में हरियाली को बढ़ाने, पेड़ पौधों के संरक्षण के लिए नारियल के खोल के साथ शोध किया जा रहा है। अरावली की पथरीली जमीन और पानी की कमी के कारण पौधे विकसित नहीं हो पाते हैं।
इसके लिए नारियल के खोल को पौधों की जड़ों में रखकर पौधों को नमी पहुंचाई जा रही है। सेव अरावली संस्था ने एक महीने में करीब 500 पौधों पर काम किया, जिसमें करीब 400 पौधों से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।
वन विभाग ने पशुओं से पौधों को बचाने के लिए 78 हेक्टेयर में सुरक्षा कवच को तैयार किया है। इसमें अब अन्य पौधों पर यह फॉर्मूला लागू करने की तैयारी की जा रही है। वहीं, वन विभाग ने सुरक्षा कवच के लिए दीवार बनाई है। यह सुरक्षा कवच इस वित्तीय वर्ष में कुछ हेक्टेयर और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।
हरियाली बढ़ाने के लिए लगाए 50 हजार पौधे
वन विभाग ने इस वर्ष करीब 50 हजार पौधे लगाए हैं। यह आंकड़ा गत वर्ष की अपेक्षा अधिक है। इस बार नीम एवं बड के पौधे लगाए गए हैं, लेकिन पानी की कमी के कारण पेड़ों की संख्या कम हो रही है। इसके लिए बारिश के पानी को रोकने के प्रबंध किए जा रहे हैं।
अरावली में नारियल के खोल के माध्यम से पौधों को बचाने पर शोध किया जा रहा है। इसके लिए कुछ इकाईयों के माध्यम से टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है। पेड़ पौधों के लिए पानी की कमी सामने आ रही है।-जितेंद्र भडाना, संस्थापक, सेव अरावली संस्था
अरावली में पौधरोपण कर लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। पौधों को पशुओं से बचाने के लिए सुरक्षा कवच को तैयार कर दिया गया है। अरावली सेव संस्था के साथ मिलकर कार्य किया जा रहा है।-रंजीथा, वन अधिकारी फरीदाबाद