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कायतकर्ताओं को निराश कर रही है सीएम खिड़की

Sun, 07 Feb 2016 01:43 PM IST
संजय मग्गू/अमर उजाला, फरीदाबाद
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सीएम के संज्ञान में लाकर अपनी शिकायतों के निराकरण की सोच रखने वालों को सीएम खिड़की निराश कर रही है।
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लोगों का पक्ष है कि शिकायतों का कागजों में ही निराकरण कर दिया जाता है। कई बार तो शिकायत जांच के लिए उसी व्यक्ति के पास पहुंच जाती है, जो आरोपी होता है।

कई शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई अधिकारी तो सीएम खिड़की को गलत जवाब देकर गुमराह भी कर देते हैं।

एक मामले में तो अदालत के आदेश पर नगर परिषद के तीन अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस भी दर्ज हो चुका है। सीएम खिड़की पर दी शिकायतों का निराकरण किस प्रकार होता है पेश है उनकी एक बानगी।
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मामला एक : राजीव नगर निवासी मैथिली ब्राह्मण सभा के महासचिव बृजमोहन शर्मा व उनके साथ कॉलोनी के कई लोगों ने 12 अक्तूबर 2015 को सीएम विंडो पर शिकायत लगाकर राजीव नगर व मोहननगर की सफाई व्यवस्था की शिकायत की थी।

कहा था कि सफाई ना होने के चलते जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए हैं व नालियां ओवरफ्लो रहती हैं। सुनवाई ना होने पर 17 दिसंबर को दोबारा शिकायत की गई।

शर्मा का कहना है कि शिकायत के चार दिन बाद नगर परिषद के अधिकारियों ने दो घंटे के लिए जेसीबी भेज दी। इसके साथ ही यह कहते हुए कि सफाई करा दी गई है, डस्टबिन भी रखवा दिए गए हैं तथा व्यवस्था को ठीक करा दिया गया है, शिकायत का निराकरण कर दिया गया। अब उन्होंने तीन फरवरी को फिर से वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए सीएम खिड़की में शिकायत की है।

मामला दो : गांव मीतरोल निवासी आरटीआई कार्यकर्ता अमरचंद शर्मा ने 17 मार्च 2015 को सीएम खिड़की पर आंगनबाड़ी केंद्रों में हेराफेरी की शिकायत की थी। उन्होंने इससे पूर्व जिले के अधिकरियों से आरटीआई के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों के बारे में जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी।

आला अधिकारियों तक से शिकायत करने के बाद भी जब समाधान नहीं मिला तो उन्होंने 17 मार्च को सीएम खिड़की पर शिकायत की, लेकिन करीब एक वर्ष बाद भी शिकायत समाधान नहीं हुआ।

शिकायत को ठंडे बस्ते में मानते हुए शर्मा ने सीएम खिड़की पोर्टल से शिकायत का स्टेटस जानना चाहा तो पता चला कि 14 जनवरी को 2016 को शिकायत जिला कार्यक्रम अधिकारी के पास पहुंच चुकी है।

हैरत तो तब हुई जब कि अधिकारी के संज्ञान में शिकायत थी ही नहीं। हालांकि डीसी अशोक शर्मा ने शिकायत करने पर संबंधित अधिकारी को 15 दिन में निराकरण का निर्देश दिया है।

मामला तीन : सामाजिक संगठनों ने शहर से मीट की दुकानों को बंद कराने को लेकर अधिकारियों के पास चक्कर लगाने के बाद आठ दिसंबर 2015 को सीएम विंडो पर शिकायत लगाई थी।
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जवाब में नगर परिषद के अधिकारियों ने कहा कि शहर से मीट की दुकानों को बंद करा दिया गया है। गलत जानकारी मिलने पर व्यापार मंडल के अध्यक्ष संदीप गोयल ने अदालत में इस्तगासा कर दिया।
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