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'पाठ्यक्रम में शामिल होगा गीता और योग की शिक्षा'

Mon, 02 Feb 2015 08:19 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, फरीदाबाद
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि हरियाणा में स्थित वेदों की रचनास्थली सरस्वती नदी के उद्गम स्थल व प्रवाह मार्ग पर पर्यटन केंद्र विकसित किए जाएंगे।
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इसका जुड़ाव यमुना नगर से है। विद्यार्थियों को हमारी प्राचीन संस्कृति के अमूल्य संस्कार देने के लिए गीता के दर्शन को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

हरियाणा को विश्व पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार इसके लिए मास्टर प्लान तैयार कर रही है। इनमें खासकर विश्व प्रसिद्ध धर्मनगरी व पर्यटन स्थल कुरुक्षेत्र और करनाल शामिल हैं।
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हिसार और करनाल में एयरपोर्ट की पट्टी का विस्तार किया जाएगा। वह रविवार को सूरजकुंड मेले की शुरुआत करने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होेंने बताया कि मास्टर प्लान के तहत राज्य सरकार ने योजनाओं को अमलीजामा पहनाने का काम शुरू कर दिया है।

ब्रह्मसरोवर पर भगवान श्रीकृष्ण की विराट मूर्ति स्थापित करने के लिए आठ करोड़ रुपये की राशि भी मंजूर कर दी गई है।

पर्यटन विभाग व कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की तरफ से ज्योति नगर के सूरज कुंड तीर्थ का नवनिर्माण करने के लिए एक मास्टर प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि करनाल कर्ण की नगरी है, इसलिए यहां उनके नाम से कर्णताल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी तक हरियाणा में हवाई पट्टियां तो हैं लेकिन कहीं एयरपोर्ट नहीं है। सरकार हिसार में हवाई पट्टी का विस्तार कर एयरपोर्ट बनाएगी।

हरियाणा के शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री रामविलास शर्मा तथा छत्तीसगढ़ के पर्यटन मंत्री अजय चन्द्राकर ने अपने-अपने प्रदेशों की सांस्कृतिक विविधता, सांस्कृतिक विरासत तथा लोक कलाओं की जानकारी दी।

इस मौके पर पर्यटन विभाग के अतिरिक्त मुख्य प्रधान सचिव एसएस ढिल्लो, मुख्यमंत्री की अतिरिक्त प्रधान सचिव सुमिता मिश्रा, श्रीलंका के उच्चायुक्त प्रोफेसर सुदर्शन, युगांडा की उच्चायुक्त रिटा किटसु, विधायक विपुल गोयल, मूलचंद शर्मा एवं सीमा त्रिखा सहित कई लोग मौजूद रहे।

गीता और योग भगवाकरण नहीं
-मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही गीता और योग को शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रही है। इस पर लोग हो हल्ला मचा रहे हैं। इसे भगवाकरण का नाम दे रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि गीता और योग का भगवाकरण से कोई लेना-देना नहीं है। बल्कि इसके माध्यम से प्रदेश के बच्चों को संस्कारवान बनाना है। आज के दौर को देखते हुए बच्चों को गीता और योग का ज्ञान जरूरी है। इससे उनमें संस्कार पैदा होंगे और उन्हें अपनी सभ्यता व संस्कृति को जानने समझने का अवसर मिलेगा।
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