अंजलि के पिता के फोन पर आया मैसेज
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मगर स्कूल ने वेटिंग का 16 नंबर की पर्ची देकर गर्मी की छुट्टियों के बाद बुलाया। वह जुलाई और फिर अगस्त में भी स्कूल गए लेकिन बहाना बताकर उन्हें दाखिला नहीं दिया गया। दीपक ने बताया कि सरकार की ओर से फोन भी आया था उन्होंने दाखिला नहीं होने की जानकारी दी थी।
वहीं, मुख्यमंत्री की चिट्ठी मिलने के बाद जब दीपक स्कूूल पहुंचे तो स्कूल ने माना की दाखिला नहीं दिया गया है। मगर इस बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया। कहा कि जब सरकार पूछेगी तो जवाब देंगे।
दिल्ली सरकार के अधिकारियों से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस मामले में वह जांच के बाद ही कुछ कहेंगे। शिक्षा निदेशालय से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि इसमें अभिभावकों की गलती है।
नहीं थे जरूरी दस्तावेज
शिक्षा निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अभिभावक के पास जरूरी दस्तावेज नहीं थे। उनका कहना था कि बच्ची ईडब्ल्यूएस कैटेगिरी के एससी एसटी वर्ग में आती है। उनके पास संबंधित दस्तावेज नहीं थे। उन्हें बुलाया गया था लेकिन वह नहीं आए। शिक्षा निदेशालय के मुताबिक, अभिभावक दूसरे स्कूल की डिमांड कर रहे थे। इस पर दीपक व उनकी पत्नी सपना का कहना है की उनके पास जाति प्रमाणपत्र, बेटी का जन्म प्रमाण पत्र सभी दस्तावेज मौजूद थे। स्कूल में जमा भी कराया है।