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दिल्ली को अच्छा काम नहीं करने देगी केंद्र सरकार: सीएम केजरीवाल

Sat, 07 Jul 2018 08:29 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : एलजी के ट्विटर अकाउंट से
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आशंका जताई है कि नियुक्तियों और तबादले के अधिकार का इस्तेमाल कर केंद्र सरकार दिल्ली सरकार को अच्छा काम नहीं करने देगी। उधर, एलजी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की नियमित बेंच के फैसले का इंतजार करने के पक्ष में हैं।

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अरविंद केजरीवाल ने कहा कि फिलहाल केंद्र व दिल्ली में एक-दूसरे की विरोधी पार्टियों की सरकारें हैं। केंद्र सरकार नहीं चाहेगी कि दिल्ली सरकार अच्छा काम करें। अगर कोई अफसर अच्छा काम करेगा तो प्रदेश सरकार को नाकाम कर चुनावी फायदा लेने के लिए केंद्र सरकार उसका ट्रांसफर कर देगी।

यह सोचने की बात है कि सभी काम की जिम्मेदारी तो दिल्ली सरकार की है, पर उसे कौन अफसर करेगा, यह केंद्र सरकार तय करेगी। मतलब केंद्र अफसर लगाएगी और काम दिल्ली सकरार करवाएगी। केजरीवाल ने कहा कि सरकार सभी संभव विकल्पों पर विचार कर रही है।
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इस संबंध में उपराज्यपाल अनिल बैजल की तरफ से बताया गया है कि सेवाओं से जुड़े मामले पर अभी सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आया है। इसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की नियमित बेंच करेगी।

अदालत का फैसला आने तक केंद्रीय गृह मंत्रालय का वह नोटिफिकेशन प्रभावी रहेगा, जिसमें सेवाओं को उपराज्यपाल के अधीन किया गया था। एलजी का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 21 मई 2015 को एक अधिसूचना जारी की थी।

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इसमें बताया गया था कि संविधान के अनुच्छेद 239 एवं 239एए के तहत सर्विसेज से जड़े मामले दिल्ली विधानसभा के दायरे में नहीं आते। लिहाजा दिल्ली सरकार के पास इस बारे में कोई कार्यकारी ताकत नहीं होगी।

बीतेे साल हाईकोर्ट के फैसले में भी इसे कायम रखा गया था। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ के फैसले में केंद्र सरकार को सलाह दी गई है कि नौ दूसरी अपीलें, जिनमें सेवा भी शामिल है, को नियमित संवैधानिक पीठ में सुना जाएगा। पीठ का फैसला आने तक मई 2015 की अधिसूचना वैध रहेगी।

अपने बयान में उपराज्यपाल ने कहा कि अभी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जा रहा है। दिल्ली विधानसभा की विधायी शक्तियों के प्रस्तावों/मामलों पर अदालत ने कहा है कि मंत्रिपरिषद के फैसलों पर उपराज्यपाल की सहमति की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उपराज्यपाल को इसकी सूचना देना अनिवार्य है।

अदालत के फैसले का हवाला देते हुये उपराज्यपाल ने कहा है कि दिल्ली में जहां एक तरफ मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करते हैं, वहीं, उपराज्यपाल की भी एक टीम है। इसे स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा है कि एक साइकिल पर दो सवारी की तरह हैं। इसका संचालन एवं नियंत्रण राष्ट्रपति के द्वारा होता है। उपराज्यपाल के मुताबिक, अदालत ने जोर दिया है कि यहां एकाधिकार एवं अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है।
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