एलजी से मिलने पहुंचे केजरीवाल और सिसोदिया
- फोटो : एलजी के ट्विटर अकाउंट से
इसमें बताया गया था कि संविधान के अनुच्छेद 239 एवं 239एए के तहत सर्विसेज से जड़े मामले दिल्ली विधानसभा के दायरे में नहीं आते। लिहाजा दिल्ली सरकार के पास इस बारे में कोई कार्यकारी ताकत नहीं होगी।
बीतेे साल हाईकोर्ट के फैसले में भी इसे कायम रखा गया था। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ के फैसले में केंद्र सरकार को सलाह दी गई है कि नौ दूसरी अपीलें, जिनमें सेवा भी शामिल है, को नियमित संवैधानिक पीठ में सुना जाएगा। पीठ का फैसला आने तक मई 2015 की अधिसूचना वैध रहेगी।
अपने बयान में उपराज्यपाल ने कहा कि अभी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जा रहा है। दिल्ली विधानसभा की विधायी शक्तियों के प्रस्तावों/मामलों पर अदालत ने कहा है कि मंत्रिपरिषद के फैसलों पर उपराज्यपाल की सहमति की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उपराज्यपाल को इसकी सूचना देना अनिवार्य है।
अदालत के फैसले का हवाला देते हुये उपराज्यपाल ने कहा है कि दिल्ली में जहां एक तरफ मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करते हैं, वहीं, उपराज्यपाल की भी एक टीम है। इसे स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा है कि एक साइकिल पर दो सवारी की तरह हैं। इसका संचालन एवं नियंत्रण राष्ट्रपति के द्वारा होता है। उपराज्यपाल के मुताबिक, अदालत ने जोर दिया है कि यहां एकाधिकार एवं अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है।