दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार को नैतिकता के फेर में फंसने का डर सता रहा है। यही वजह है कि परंपरा से हटकर विधायकों की शपथ के अगले दिन विश्वास मत हासिल करना चाहते हैं। लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
ऐसे में अगर विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव 2 जनवरी को होता है और कांग्रेस साथ नहीं देती है तो भाजपा का विधायक विधानसभा बन जाएगा। इस दशा में अरविंद केजरीवाल का प्रत्याशी हारेगा और नैतिकता के आधार पर विपक्ष इस्तीफे की मांग करेगा।
अरविंद केजरीवाल की कैबिनेट ने सोमवार को उपराज्यपाल से सिफारिश की थी कि 1 जनवरी से शुरू होने वाले सत्र में पहले दिन विधायकों को शपथ दिलाई जाए। दूसरे दिन प्रोटेम स्पीकर ही विश्वास मत प्रस्ताव कराए और तीसरे दिन विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव हो।
चार-पांच जनवरी को छुट्टी के बाद 6 जनवरी को उपराज्यपाल अभिभाषण और 7 जनवरी को अभिभाषण पर चर्चा करके उसे पास कर दिया जाए।
लोकसभा व दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा बताते हैं कि विधानसभा की कार्रवाई तय करने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को होता है। न कि कैबिनेट को।
फिर लोकसभा या दिल्ली विधानसभा की अभी तक की परंपरा रही है कि सदस्यों को शपथ दिलाए जाने के बाद नए विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव हो। उसके बाद विश्वास मत हासिल किया जाए। अध्यक्ष के चुनाव से पूर्व विश्वास मत सिद्ध करने की सिफारिश समझ से परे है।
केजरीवाल कैबिनेट की तरफ से पहले बहुमत सिद्ध करने पर राजनीति के जानकार बताते हैं कि नैतिक हार का डर केजरीवाल के मन में है। यही वजह है कि पहले विश्वास मत कराना चाहते हैं। क्योंकि कांग्रेस ने केजरीवाल को बहुमत सिद्ध करने में साथ देने का वायदा किया है।
विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने में अगर आप के नेता कांग्रेस का साथ नहीं मांगते हैं तो वह इनके पक्ष में वोट नहीं करेंगे। बहुमत में कांग्रेस व्हीप जारी करेगी जबकि अध्यक्ष के चुनाव में ऐसा नहीं करेगी। ऐसे में आम आदमी पार्टी का प्रत्याशी हार जाएगा। इस नैतिक हार का हवाला देकर विपक्ष केजरीवाल से इस्तीफा मांगेगा।
प्रो. जगदीश मुखी ने ठुकराया प्रोटेम स्पीकर का पद
दिल्ली विधानसभा में विधायकों को शपथ दिलवाने और नए विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव कराने के लिए सोमवार को प्रो. जगदीश मुखी को प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने की अधिसूचना जारी कर दी गई। यह सूचना उन्हें विधानसभा सचिवालय ने दी।
लेकिन देर शाम उन्होंने विधानसभा सचिवालय को मना कर दिया। प्रो. मुखी की तरफ से पद ठुकराए जाने के बाद विधानसभा सचिवालय ने पैनल में शामिल बाकी 10 सदस्यों से बातचीत शुरू कर दी है।
अब देखना होगा कि केजरीवाल कैबिनेट नए प्रोटेम स्पीकर के लिए किसके नाम की सिफारिश करती है। प्रो. मुखी के प्रोटेम स्पीकर बनने से मना करने के पीछे राजनीति से जुड़े लोग कई मतलब निकाल रहे हैं।