जाट आंदोलन समाप्त नहीं होने से भाजपा आलाकमान मनोहर सरकार से खफा है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सीधे तौर पर इस मामले में दिलचस्पी ले रहे हैं और मुख्यमंत्री मनोहर लाल से इस मामले में हल निकालने को कहा है।
इसके साथ ही आंदोलन से जो पार्टी की साख पर बट्टा लगा है, उसकी पूर्ति के लिए भाजपा की छवि जाट हितैषी के रूप में बनाने को कहा गया है। भाजपा आलाकमान की नराजगी के बाद खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल और प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला ने मोर्चा संभाला है। पार्टी सबसे पहले खुद के जाट मंत्रियों को साधने में जुटी है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में भी छवि सुधारने पर अधिक जोर दिया गया। इसी के साथ सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को डैमेज कंट्रोल के लिए जमीनी स्तर पर काम करने का निर्देश दिया गया है।
सूत्रों की मानें तो पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इस मामले को जल्द खत्म कराना चाहते हैं। बृहस्पतिवार को हुई बैठक के बाद कृषि मंत्री ने भी कहा कि दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश में विधिवत तरीके से जाट समाज को आरक्षण दिया है।
जाट समाज के बीच अब पार्टी कार्यकर्ता जाट हितैषी की छवि बनाएंगे। इसके लिए कहा जाएगा कि भाजपा जाट आरक्षण के पक्ष में है। वह चाहे यूपी हो, हरियाणा या फिर राजस्थान। यूपी में जाटों को आरक्षण तब दिया जब रामप्रकाश गुप्ता की अगुवाई में बीजेपी सरकार थी।
राजस्थान में भी वसुंधरा राजे सरकार ने जाट आरक्षण दिया जबकि वहां कांग्रेस ने इसका विरोध किया था। हरियाणा में भी संतोषजनक समाधान निकालने का प्रयास किया गया।