श्रेणी-1
इसमें सभी मरीजों के भर्ती होने की सुविधा होगी। यहां पर मरीजों की कोरोना जांच की जाएगी। जांच हेतु मशीन शासन की ओर से मुहैया कराई जाएगी। जांच की क्वालिटी कंट्रोल की जिम्मेदारी मौजूदा समय में कोरोना की जांच कर रही मेडिकल कॉलेजों की टीम की होगी। कोरोना की जांच होने के बाद मरीजों को अलग-अलग अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जाएगा। इस अस्पताल में टेस्टिंग, होल्डिंग, इमरजेंसी ट्रामा की सुविधा मरीजों को दी जाएगी।
श्रेणी-2
यह पूरी तरह से डेडिकेटिड कोविड अस्पताल होगा, जिसमें चिकित्सकों की कंप्लीट टीम लगी होगी। आईसीयू से लेकर वेंटिलेटर तक की सुविधा इस अस्पताल में होगी। यहां पर डॉक्टरों की तैनाती रोस्टर के हिसाब से की जाएगी, जिससे की मरीजों को इलाज मिल सके। यह एक तरह से कोविड-3 स्तर का अस्पताल होगा।
श्रेणी-3
यह अस्पताल पूरी तरह से नॉन कोविड होगा, जिसमें उन मरीजों का इलाज किया जाएगा जो कोरोना के अतिरिक्त अन्य बीमारी से पीड़ित है लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा था। इस अस्पताल में सभी मरीज कोरोना जांच के बाद पहुंचेंगे, जिससे की संक्रमण न फैल सके। इस अस्पताल में एक तरह से गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को उचित इलाज दिया जाएगा।
एकल क्लीनिक वाले डॉक्टरों को पूल में लाने की तैयारी
मरीजों को इलाज दिलाने के पीछे असली मंशा एकल क्लीनिक वाले चिकित्सकों को एक बड़े सेटअप से जोड़ना है, जिससे की वे बेहतर संसाधनों के बीच मरीजों का इलाज कर सकें। शासन का मानना है कि बड़ी संख्या में निजी चिकित्सक ऐसे हैं, जो अपना क्लीनिक चलाते हैं। उनमें से गिने-चुने डॉक्टर ही अस्पतालों में मरीजों को देखे जाते हैं। अगर एकल क्लीनिक वाले चिकित्सकों को जोड़कर बड़े अस्पतालों का सेटअप तैयार किया जाए तो मरीजों का बेहतर और सुरक्षित इलाज मिल सकेगा।
मेरी तरफ से उन्हें सुझाव दिया गया था कि हर मरीज को इलाज दिलाना सरकार की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए अस्पतालों का क्लस्टर तैयार कने और चिकित्सकों का पूल बनाने को कहा गया। अगर हम ऐसा कर पाएंगे तो मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा। इसमें जिला स्तर पर अब तेजी से काम शुरू हो गया है।
- डॉ. वेद प्रकाश, शासन से नामित विशेष कार्य अधिकारी व विभागाध्यक्ष पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसन, केजीएमयू
हमारी तरफ से काम शुरू हो गया है। 22-23 जून को वसुंधरा में पहले अस्पताल शुरू कर रहे हैं। उसके बाद यशोदा नेहरू नगर ने भी हमें 30 बेड दे दिए हैं। साथ ही नरेंद्र मोहन अस्पताल को भी कलस्टर में शामिल कर बड़े अस्पताल के तौर पर तैयार किया जा रहा है। बाकी चिकित्सकों का पूल बनाने का काम भी तेजी से जारी है।
- डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ