30 अप्रैल से 31 अगस्त 2025 तक के शुरुआती चार महीनों में यात्रा के 55 दिन ऐसे रहे, जब चारों धामों तक एक भी श्रद्धालु नहीं पहुंच पाया। इन्हें जीरो-तीर्थयात्री दिवस के रूप में दर्ज किया गया। इसके अलावा 89 दिन ऐसे रहे, जब चारों धामों में यात्रियों की संख्या 1 से 1,000 के बीच सिमट गई।
चारधाम यात्रा इस वर्ष जलवायु परिवर्तन की चपेट में आ गई। 30 अप्रैल से 31 अगस्त 2025 तक के शुरुआती चार महीनों में यात्रा के 55 दिन ऐसे रहे, जब चारों धामों तक एक भी श्रद्धालु नहीं पहुंच पाया। इन्हें जीरो-तीर्थयात्री दिवस के रूप में दर्ज किया गया। इसके अलावा 89 दिन ऐसे रहे, जब चारों धामों में यात्रियों की संख्या 1 से 1,000 के बीच सिमट गई।
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देहरादून स्थित सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज (एसडीसी) फाउंडेशन के ताजा रिपोर्ट के अनुसार हाल के वर्षों में यह सबसे ज्यादा यात्रा बाधित सीजन साबित हुआ है। फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने चेतावनी दी है कि अगर जलवायु परिवर्तन से निपटने के ठोस कदम नहीं उठाए गए तो चारधाम यात्रा उत्तराखंड की पर्वतीय अर्थव्यवस्था के लिए कमजोर कड़ी बन सकती है।
एसडीसी फाउंडेशन ने सुझाव दिया है कि जलवायु-संवेदनशील सड़क निर्माण और बेहतर जल निकासी तंत्र विकसित किया जाए। रियल टाइम मौसम मॉनिटरिंग सिस्टम और मजबूत संचार नेटवर्क स्थापित हों। आपदा-सुरक्षित आश्रयों का निर्माण किया जाए। प्रभावित व्यवसायों, ट्रांसपोर्टरों और सेवा प्रदाताओं के लिए आर्थिक राहत पैकेज तैयार किया जाए। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यात्रा को भविष्य में जलवायु और आपदा-सुरक्षित बनाना ही एकमात्र रास्ता है। समय आ गया है कि हम संख्या से ज्यादा मजबूती और तैयारी पर ध्यान दें।
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सबसे ज्यादा खतरे वाले धाम और मार्ग
यमुनोत्री धाम : सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यहां 23 दिन श्रद्धालु नहीं पहुंचे और 30 दिन 1,000 से कम यात्री दर्ज हुए। लगातार भूस्खलन और सड़क टूटने से यहां यात्रा बार-बार बाधित हुई। गंगोत्री धाम : 27 दिन जीरो-तीर्थयात्री दिवस और 9 दिन बेहद कम यात्रियों वाले रहे। उत्तरकाशी से गंगोत्री तक का मार्ग लगातार बंद-बंद खुलता रहा। केदारनाथ धाम : यहां भी 19 दिन 1,000 से कम यात्री पहुंचे। गौरीकुंड से ऊपर का मार्ग भूस्खलन और बारिश से बार-बार बंद होता रहा। बद्रीनाथ धाम : तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति रही, लेकिन 2 दिन बिना यात्री और 2 दिन बेहद कम उपस्थिति के साथ यात्रा प्रभावित हुई।
आपदा यात्रा की बड़ी बाधा
नौटियाल का कहना है कि चारधाम यात्रा केवल श्रद्धा का नहीं, बल्कि पहाड़ी अर्थव्यवस्था का जीवनाधार है। लेकिन इस वर्ष जलवायु-जनित आपदाओं की आवृत्ति ने दिखा दिया है कि राज्य केवल रिकॉर्ड संख्या के यात्रियों पर खुश नहीं हो सकता। हमें यात्रा को स्थिर, आपदा सुरक्षित और जलवायु-प्रतिरोधी बनाने की दिशा में तुरंत काम करना होगा। रिपोर्ट बताती है कि इस साल भारी वर्षा, अचानक आई बाढ़, बार-बार हुए भूस्खलन और सड़क धंसने जैसी घटनाओं ने यात्रा को बुरी तरह प्रभावित किया। सितंबर के शुरुआती दिनों में भी पांच दिनों तक यात्रा स्थगित रहेगी, क्योंकि यमुनोत्री व गंगोत्री के मार्ग गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त बताए गए हैं।