दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि नौकरी करने वाला हर व्यक्ति आठ घंटे काम करता है और राजधानी को साफ रखने के लिए सफाई कर्मचारियों को भी पूरा दिन काम करना होगा। अदालत ने कहा यदि ऐसा नहीं हुआ तो स्वच्छ भारत अभियान का सपना पूरा नहीं होगा।
अदालत ने कहा कि इस सपने को पूरा करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। साथ ही अदालत ने काम न करने वाले कर्मचारियों के लिए उचित विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा अदालत ने गंदगी फैलाने वाले लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने राजधानी में सफाई व्यवस्था मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि हर व्यक्ति सुबह 9 से शाम 5 बजे तक नौकरी करता है। ऐसे में सफाई कर्मचारियों को भी पूरे दिन काम करना होगा ताकि राजधानी में सफाई रहे। अदालत ने एमसीडी को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी कर्मचारी सुबह-शाम हाजिरी लगाने की अपेक्षा पूरा दिन अपने काम में लगे रहें।
अदालत ने एमसीडी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि कर्मचारियों की सुबह व शाम को बायोमैट्रिक हाजिरी की व्यवस्था है। अदालत ने कहा कि यदि ऐसा है तो राजधानी में गंदगी क्यों है। आपके पास 62 हजार 977 हजार कर्मचारी हैं, मात्र हाजिरी लगवाने की अपेक्षा काम करवाएं। कर्मचारियों को सफाई के लिए रखा है और उनको पूरी ड्यूटी देनी होगी।
अदालत ने कहा कि बैंक, निजी संस्थान व अस्पताल इत्यादि चमकते रहते हैं तो राजधानी क्यों नहीं। एमसीडी अधिवक्ता ने बचाव करते हुए कहा कि लोग भी खाने-पीने के बाद सामान फेंक कर गंदगी फैलाते हैं। हमने 6650 लोगों पर जुर्माना लगाया है। अदालत ने नाराजगी जाते हुए कहा कि वर्तमान का जो माहौल है यह चालान कम है। एक दिन में ही छह हजार चालान कट जाने चाहिए। आपके लोकल मजिस्ट्रेट क्या कर रहे हैं। जो लोग गंदगी फैला रहे हैं उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें।
स्वच्छ भारत अभियान
खंडपीठ ने कहा स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है यदि सब ऐसे ही चलता रहा तो अभियान नहीं चल पाएगा। सभी को साथ मिलका काम करना होगा। एमसीडी निरीक्षक कर्मचारियों का बीट अनुसार काम तय करें। यदि आपको सफाई के लिए उपकरण, ट्रक या कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है तो बताएं, हम इस मुद्दे पर आदेश जारी करें, लेकिन स्वच्छ भारत का सपना पूरा होना चाहिए। अदालत ने कहा इसके बावजूद काम न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।