जहां धर्म में भेदभाव नहीं करने की सीख दी जानी चाहिए, वहीं प्रिंसिपल इंचार्ज ने संप्रदाय के नाम पर बच्चों के बैठने की व्यवस्था कर दिया। मामले का खुलासा होने पर आनन-फानन में नगर निगम ने जांच के आदेश दे दिए हैं। उत्तरी निगम के मेयर का कहना है कि जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उधर, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) ने भी मौजूदा व्यवस्था को तत्काल खत्म करते हुए दो दिनों के अंदर सभी सेक्शन में छात्रों को बगैर किसी भेदभाव के समायोजित करने के आदेश दिए हैं।
वजीराबाद गांव स्थित एमसीडी के प्राइमरी स्कूल में पांचवीं कक्षा तक कुल 17 सेक्शन हैं। इनमें से आठ को धर्म के आधार पर अलग कक्षाओं में बांट दिया गया। इस बात का खुलासा होने के बाद निगम ने तत्काल जांच के आदेश दिए। मेयर आदेश गुप्ता ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि निगम के तहत संचालित होने वाले स्कूलों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, बावजूद अगर ऐसी चूक हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। मेयर ने कहा कि बताया कि इस मामले की जांच के लिए निदेशक और इंस्पेक्टर भी स्कूल पहुंचकर मामले से जुड़े तमाम पहलुओं की छानबीन में जुटे हैं।
तीन महीने से अलग कमरों में बिठाए जा रहे हैं बच्चे
सवाल उठता है कि जब स्कूलों में अलग अलग सेक्शन का प्रावधान नहीं किया गया तो किसके आदेश पर इन्हें अलग अलग कमरों में बिठाया गया। ऐसा करने के बाद भी पिछले तीन महीने से अधिक वक्त से अगर स्कूल में ऐसा चल रहा था तो इसकी आला अधिकारियों को भनक क्यों नहीं मिल सकी।
शिक्षा निदेशक से जांच करवाएगी सरकार
दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने इस प्रकरणा पर ट्विट किया कि भाजपा शासित एमसीडी में हिन्दू मुस्लिम बच्चों को अलग अलग कमरों में बिठाने की हरकत देश के संविधान के खिलाफ सबसे बड़ी साजिश है। उन्होंने मैंने दिल्ली के शिक्षा निदेशक को इस मामले की जांच के बाद शुक्रवार तक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।