दिल्ली पुलिस का दावा-प्रदर्शनकारियों की निगरानी नहीं, वांछित अपराधियों और हिस्ट्रीशीटरों की पहचान करना उद्देश्य
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (एफआरएस) की मदद से 216 से अधिक बदमाशों की पहचान करने का दावा किया है। इनमें सबसे अधिक 26 पश्चिमी दिल्ली, 23 उत्तर-पूर्वी और 22 दक्षिणी दिल्ली के हैं। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल के आसपास एफआरएस की चार यूनिट प्रमुख प्रवेश और निकास मार्गों पर तैनात की गई हैं। इनका उद्देश्य वांछित अपराधियों, फरार आरोपियों, हिस्ट्रीशीटरों और ‘बैड कैरेक्टर’ की पहचान कर कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि एफआरएस सीधे दिल्ली पुलिस के आपराधिक डेटाबेस से जुड़ा है। कैमरे से किसी व्यक्ति का चेहरा रिकॉर्ड होते ही उसका मिलान डेटाबेस से किया जाता है। यदि कोई वांछित या फरार आरोपी चिन्हित होता है तो संबंधित पुलिस इकाई को तत्काल सूचना भेजी जाती है, ताकि आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों के अनुसार, उच्च क्षमता वाले ये कैमरे दूर से भी स्पष्ट तस्वीर लेने में सक्षम हैं।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल सामान्य प्रदर्शनकारियों की निगरानी या उनकी जासूसी के लिए नहीं किया जा रहा, बल्कि बड़े जमावड़ों का फायदा उठाकर उपद्रव फैलाने की कोशिश करने वाले आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों की पहचान के लिए किया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि इससे आदतन अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर प्रभावी नजर रखने में मदद मिलेगी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली जिले में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर एफआरएस कैमरे लगाए गए हैं। इससे पहले भी गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, होली, दीपावली, ईद और रामलीला जैसे बड़े आयोजनों के दौरान इस तकनीक का उपयोग किया जाता रहा है। पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों की जासूसी संबंधी दावे भ्रामक हैं और सुरक्षा एजेंसियों को मिले इनपुट के आधार पर ही यह व्यवस्था लागू की गई है।