यह याचिका 19 अक्तूबर को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के एसईएम रितु राज द्वारा पारित उस आदेश के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें दोनों नेताओं की हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी।
वकीलों की दलीलें और कोर्ट का रुख
अदालत में पेश हुए अधिवक्ता अभिक चिमनी और पुष्प शर्मा ने दोनों नेताओं की रिहाई की मांग की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि वे अब दोबारा ऐसा कोई कथित अपराध नहीं दोहराएंगे और किसी भी तरह के उल्लंघन की कोई आशंका नहीं है। वकीलों ने यह भी कहा कि दोनों नेताओं ने 10 अक्तूबर के बाद प्रदर्शन के लिए कोई आह्वान नहीं किया था और वे व्यक्तिगत रूप से जंतर-मंतर गए थे।
दोनों ने किया बांड का उल्लंघन
इससे पहले, सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने शांति भंग होने और सार्वजनिक शांति में खलल पड़ने की आशंका जताते हुए पांच दिन की और रिडटेंशन की मांग की थी, जिसे मजिस्ट्रेट ने स्वीकार कर लिया था। कोर्ट ने कहा कि दोनों नेताओं ने दक्षिण-पश्चिम जिले के एलईएम के समक्ष 11 अक्तूबर को निष्पादित बांड का उल्लंघन किया था।
मुचल्का पर भी उठे थे सवाल
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों नेताओं की जमानत के लिए पेश किए गए मुचल्कों को अयोग्य करार दिया था। कोर्ट ने पाया कि तीर्थ नामक एक मुचल्के के आधार कार्ड और बांड की तस्वीर में मेल नहीं खा रहा था, और वह अन्य वैध दस्तावेज भी पेश नहीं कर सका। वहीं, दूसरे मुचल्के मन्नू राज आनंद को सौरभ दास के माता-पिता का नाम और पते जैसी बुनियादी जानकारियां तक नहीं पता थीं। इसी के चलते कोर्ट ने उन्हें नए सिरे से मुचल्का दाखिल करने का निर्देश दिया था।