गुड़गांव में बस क्यू शेल्टरों के अभाव में लोगों को सिटी बसें दौड़कर पकड़नी पड़ रही है। सिटी बस संचालन को पूरे दो साल होने को है, लेकिन अभी तक महज 4 बस क्यूशेल्टरों का निर्माण ही हो पाया है।
सेवा संचालन के 15 दिन के भीतर ही रोडवेज की ओर से 160 स्थानों को क्यूशेल्टर के लिए चिन्हित कर निगम और हुडा को स्थानों की सूची सौंप दी थी, लेकिन दोनों विभाग क्यूशेल्टर की योजना में अटक कर रह गए।
शहर में बढ़ती आबादी और घटते सार्वजनिक परिवहन साधनों के चलते 12 मई 2012 को शहर में 36 बसों से सिटी बस सेवा आरंभ की गई थी। कुछ ही समय में सेवा शहर की लाइफ लाइन बन गई। समय गुजरने के साथ ही सेवा में अव्यवस्थाओं की भरमार हो गई। इन्हीं में से बस क्यूशेल्टर और बसों के संचालन की नियत समय-सारणी न होना भी है।
स्टैंड पर खड़े यात्रियों को यही नहीं पता होता है कि बस किनती देर में आएगी। जैसे ही बस दिखती है, बस की ओर दौड़ कर अपनी सीट सुनिश्चित करने की जुगत में लग जाते हैं। इसी जद्दोजहद के बीच कई बार छोटी-छोटी दुर्घटनाएं और कहासुनी भी देखी जा सकती है। कई स्थानों पर देर तक बसों की इंतजार करना पड़ता। इस बीच रोडवेज शहर में सात से 20 मिनट की फ्रिक्वेंसी का दावा कर रहा है।
ये थी योजना
बस क्यूशेल्टर की योजना क्यूशेल्टर पर बसों की समय सारणी चस्पा की जानी थी। हर क्यूशेल्टर पर बस के पहुंचने समय के साथ दूसरे स्टैंड का समय भी लिखा जाना था। लेकिन क्यू शेल्टरों का निर्माण ही नहीं हो पाया। जहां क्यूशेल्टरों का निर्माण हो गया है वहां अभी तक यह व्यवस्था नहीं की गई।
इसके लिए विभाग एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे हैं। रोडवेज अधिकारियों के मुताबिक क्यू शेल्टर के निर्माण की जिम्मेदारी विकास एजेंसियों की है। शेल्टर का डिजाइन आदि भी एजेंसियों की ओर से तय किया जाना है। दूसरी ओर निगम अधिकारी बस क्यूशेल्टर में देरी के लिए हुडा विभाग पर दोष मढ़ रहे हैं। हुडा की ओर से सहयोग नहीं मिलने की बात कहीं जा रही है।
नगर निगम के चीफ इंजीनियर बीएस सिंगरोहा ने कहा कि जब तक क्यू शेल्टरों का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक निगम की ओर से अस्थाई रूप से शेड, पीने की पानी और बैंच की व्यवस्था कराई जानी है। बसों की समय सारणी रोडवेज की ओर से तय की जानी है। शेड तैयार होने के बाद रोडवेज यहां अपनी समय सारणी चस्पा कर राहत प्रदान करें। उसी समय-सारणी को क्यूशेल्टर पर चस्पा कर दिया जाएगा।